नई दिल्ली: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा दी थी और देश को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था. उनका कहना था कि उन्होंने ‘स्वच्छ भारत’ का सपना देखा था, जिसके लिए वे चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें.

महात्‍मा गांधी के स्‍वच्‍छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्‍टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया और इसके सफल कार्यान्वयन हेतु भारत के सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की. इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150वीं जयंती को इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके स्वच्छ भारत अभियान सफाई करने की दिशा में प्रतिवर्ष 100 घंटे के श्रमदान के लिए लोगों को प्रेरित करता है. यह महत्वाकांक्षी अभियान दो श्रेणियों में बंटा हुआ है. ये श्रेणियां हैं- स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत अभियान (शहरी).

शौचालय निर्माण में हुई 20 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी

आज से तीन साल पहले जब पीएम मोदी ने इस अभियान की शुरुआत की थी उस समय केवल 10 में से 4 घरों में शौचालय थे, वहीं मौजूदा समय में दस घरों में से क‍रीब 6 घरों (61.72 प्रतिशत) शौचालय हैं. स्‍वच्‍छ भारत अभियान लांच होने के बाद अबतक 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है. यह बढ़ोतरी इसलिए संभव हो पाई है, क्‍योंकि शौचालय बनवाने के लिए सरकारी सहायता मिल रही है. अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन लांच करने के बाद से लेकर अब तक (निर्धारित लक्ष्‍य से आधे समय में) भारत में करीब 4 करोड़ शौचालय बनाए जा चुके हैं.

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2016-17 में 2 करोड़ से ज्‍यादा शौचालय का निर्माण

मोदी सरकार में शौचालय बनवाने की गति तेजी से बढ़ी है. 2012-13 और 2013-14 हर साल 50 लाख से कम शौचालय बने, लेकिन स्‍वच्‍छ भारत मिशन के बाद इसने रफ्तार पकड़ ली. 2016-17 में 2 करोड़ से ज्‍यादा शौचालय बने.

इस साल 83 प्रतिशत लोगों को हुई अधिक स्वच्छता महसूस

देश के 434 शहरों एवं नगरों में कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के अनुसार इसमें हिस्सा लेने वाले 83 प्रतिशत से अधिक लोगों ने बताया कि उनका क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में अधिक स्वच्छ हुआ है. सरकार की ओर से जारी सर्वेक्षण परिणाम में यह बात सामने आई हैं. स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 के अनुसार, 82 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने स्वच्छता बुनियादी ढांचा और अधिक कूड़ेदान की उपलब्धता और घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित करने जैसी सेवाओं में सुधार के बारे में बताया जबकि 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों तक बेहतर पहुंच के बारे में बताया.

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इसमें कहा गया कि 404 शहरों और कस्बों के 75 प्रतिशत आवासीय क्षेत्र में अधिक स्वच्छता देखी गई. इसके साथ ही 185 शहरों में रेलवे स्टेशन के आस-पास का पूरा इलाका स्वच्छ बताया गया है. सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, 75 प्रतिशत सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय हवादार थे. वहां पर्याप्त रोशनी और जल आपूर्ति थी. 297 शहरों और कस्बों के 80 प्रतिशत वाडरे में घर-घर जाकर कूड़ा एकत्रित किया जा रहा है.

जब पीएम ने खुद थामा झाड़ू

महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के पास स्वयं झाड़ू उठाकर स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी. फिर वो वाल्मिकी बस्ती पहुंचे और वहां भी साफ-सफाई की और कूड़ा उठाया. उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन बनाते हुए देश के लोगों को मंत्र दिया था, ‘ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे’.

हर वर्ग का मिल रहा है साथ
देश में साफ-सफाई के इस विशाल जन आंदोलन में समाज के हर वर्ग के लोगों और संस्थाओं ने साथ दिया. सरकारी अधिकारियों से लेकर, सीमा की रक्षा में जुटे वीर जवानों तक, बॉलीवुड कलाकारों से लेकर नामचीन खिलाड़ियों तक, बड़े-बड़े उद्योगपतियों से लेकर आध्यात्मिक गुरुओं तक, सभी इस पवित्र कार्य से जुड़ते चले गए. इसमें अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल और मैरी कॉम जैसी हस्तियों के योगदान बेहद सराहनीय है.

नमामि गंगे

भारत के लिए गंगा का न सिर्फ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है, बल्कि देश की करीब 40 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी रूप में आर्थिक रूप से इसपर निर्भर है. स्वच्छ भारत अभियान के तहत नमामि गंगे परियोजना मां गंगा की सफाई का एक बहुत बड़ा मिशन है.

2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी. अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है.