नई दिल्ली। भले ही लोकसभा-विधानसभा उपचुनावों में बीजेपी और एनडीए सरकार के लिए बुरी खबर आई हो, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर सरकार के लिए राहत भरी खबर आई है. भारत की आर्थिक वृद्धि दर यानि जीडीपी  जनवरी-मार्च तिमाही में 7.7 प्रतिशत रही. एक साल पहले इसी तिमाही में ये 6.1 प्रतिशत थी. साल 2017- 18 में आर्थिक वृद्धि दर धीमी पड़कर 6.7 प्रतिशत रही। इससे पिछले वर्ष यह 7.1 प्रतिशत थी. पिछले साल नोटबंदी के बाद से आर्थिक वृद्धि दर में बड़ी गिरावट आई थी और ये 6.1 के निचले स्तर पर पहुंच गई थी. आर्थिक फ्रंट पर सरकार के लिए ये एक बड़ी राहत की बात है. आर्थिक दर को लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है. विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी जैसे फैसले से अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट आई है. Also Read - पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति और मॉरीशस के प्रधानमंत्री से की बात, बोले, संकट में साथ खड़ा है भारत

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वित्तवर्ष 2011-12 की कीमतों को आधार वर्ष मानते हुए, वित्तवर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में जीडीपी की विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज की गई, जबकि पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्रमश: 5.6 फीसदी, 6.3 फीसदी और 7 फीसदी रही थी. इसमें कृषि (4.5 फीसदी), विनिर्माण (9.1 फीसदी) और निर्माण (11.5 फीसदी) क्षेत्र में हुई तेज वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा. Also Read - पाकिस्तान में भीषण विमान हादसा, कई लोगों की मौत होने की आशंका; पीएम मोदी ने ट्वीट कर जताया दुख

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के आंकड़ों से पहले बुधवार को रुपये में 43 पैसे की जोरदार बढ़त दर्ज हुई थी और यह 67.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. सरकार ने बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े आज जारी किए. तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर है और तेज गति से बढ़ने को तैयार है.