उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन में ‘उचित’ जगह नहीं मिलने की वजह से राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) नाराज बतायी जा रही है. राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 पर बसपा और सपा ने चुनाव लड़ने का फैसला किया. इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी व सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी व राय बरेली से भी ये दोनों अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे. ऐसे में इस गठबंधन ने केवल सीटें छोड़ी हैं जिस पर अन्य सहयोगी दल चुनाव लड़ सकते हैं.

दूसरी तरह इस गठबंधन के बाहर रखी गई कांग्रेस पार्टी ने भी रालोद के साथ गठबंधन का संकेत दिेए हैं, लेकिन रालोद के प्रमुख और छोटे चौधरी के नाम से पहचाने जाने वाले अजित सिंह अब भी सपा-बसपा गठबंधन में बने रहने की कवायद कर रहे हैं. रालोद इस गठबंधन में अपने लिए पांच सीटों की मांग करती रही है, लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि वह तीन सीटों पर भी तैयार हो सकती है.

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रालोद के एक वरिष्ठ नेता ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा है कि शनिवार को बसपा प्रमुख मायावती के साथ प्रेस कांफ्रेंस के बाद हमने अखिलेश यादव से बात की है. हमने उनसे कहा है कि रालोद को निश्चित तौर पर सम्मानित संख्या में सीटें दी जानी चाहिए. उन्होंने (अखिलेश यादव) ने इस बारे में बताने को कहा है. सूत्रों ने कहा कि रालोद शुरू से ही कहती आ रही है कि दो सीट उसके लिए काफी नहीं है. अगर उसे एक और सीट दे दी जाती है तो वह गठबंधन में शामिल होने को तैयार हो जाएगी. रालोद के एक नेता ने कहा कि उनकी पार्टी के लिए गठबंधन ने मथुरा और बागपत की सीटें छोड़ी हैं. हमने मुजफ्फरनगर पर दावा किया है. हमें उम्मीद है कि सपा-बसपा गठबंधन को एक और सीट छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी.