Ghazipur Border News: नए कृषि कानूनों के खिलाफ 1 साल से ज्यादा समय से किसानों का प्रदर्शन (Kisan Andolan) जारी है. किसानों के प्रदर्शन की वजह से गाजीपुर बॉर्डर बंद पड़ा है. इससे नोएडा से दिल्ली जाने वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को फटकार लगाते हुए कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध करने का अधिकार है, लेकिन वे अनिश्चितकाल के लिए सड़क अवरुद्ध नहीं कर सकते.Also Read - Kisan Andolan Live Updates: किसानों को सरकार का प्रस्ताव मंजूर, आज होगा आंदोलन खत्म करने का फैसला!

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद किसान नेता राकेश टिकैट (Rakesh Tikait)ने NH-24 के दिल्ली-गाजीपुर मुर्गा मंडी की तरफ जाने वाली सर्विस लेन को खुद खुलवाया. किसानों ने अपना सामान हटाना शुरू कर दिया. किसानों का कहना है कि सड़क को उन्‍होंने नहीं बल्कि पुलिस ने बंद कर रखा है. राकेश टिकैत से वहां मौजूद मीडियाकर्मियों ने पूछा क्‍या सबकुछ हटा देंगे? इस पर उन्‍होंने कहा कि हां सब हटा देंगे, इसके बाद दिल्ली जा रहे हैं और पार्लियामेंट पर बैठेंगे, जहां यह कानून बनाया गया है. हमें तो दिल्ली जाना है. Also Read - क्या अब खत्म हो जाएगा आंदोलन? सरकार का नया प्रस्ताव किसानों को मंजूर! आज SKM की बैठक में फैसला संभव

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वहीं, इसके कुछ समय के बाद भारतीय किसान यूनियन के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया है कि किसान गाजीपुर बॉर्डर खाली नहीं कर रहे हैं. BKU ने ट्वीट किया, किसानों भाइयों यह अफवाह फैलाई जा रही हैं कि गाज़ीपुर बॉर्डर खाली किया जा रहा है. यह पूर्णतया निराधार है ,हम यह दिखा रहे हैं कि रास्ता किसानों ने नही दिल्ली पुलिस ने बंद किया है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एसएस कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि कानूनी रूप से चुनौती लंबित है फिर भी न्यायालय विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन अंततः कोई समाधान निकालना होगा. पीठ ने कहा, ‘किसानों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन वे अनिश्चितकाल के लिए सड़क अवरुद्ध नहीं कर सकते. आप जिस तरीके से चाहें विरोध कर सकते हैं, लेकिन सड़कों को इस तरह अवरुद्ध नहीं कर सकते. लोगों को सड़कों पर जाने का अधिकार है लेकिन वे इसे अवरुद्ध नहीं कर सकते.’

शीर्ष अदालत ने किसान यूनियनों से इस मुद्दे पर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को सात दिसंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया. न्यायालय नोएडा की निवासी मोनिका अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया है कि किसान आंदोलन के कारण सड़क अवरुद्ध होने से आवाजाही में मुश्किल हो रही है.

(इनपुट: भाषा)