नई दिल्ली. झारखंड के सिमडेगा जिले से एक ह्रदयविदारक खबर आई है. यहां के एक गांव में बच्ची की मौत भूख से हुई है. ऐसी जानकारी है कि 11 साल की संतोष कुमारी को पिछले कई दिनों से खाना नहीं मिला था. संतोष यहां कारीमाटी में अपने परिवार के साथ रहती थी. कारीमाटी यहां के सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड की पतिअंबा पंचायत में है. Also Read - झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा- किसके आदेश से लालू को रिम्स निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया

संतोष की मां कोयली देवी ने बताया कि वह राशन की दुकान पर चावल लेने गई थी लेकिन राशन वाले ने उन्हें चावल देने से साफ इनकार कर दिया. उनकी बेटी भात-भात पुकारते हुए दुनिया से चली गई. हैरत की बात तो ये है कि कोयली देवी के पास बीपीएल कार्ड भी है लेकिन इसके बावजूद उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा था. ऐसी भी जानकारी मिली है कि राशन देने वाले ने इसलिए उनका कार्ड रद्द कर दिया था क्योंकि उससे आधार लिंक नहीं था. Also Read - Audio Case: भाजपा विधायक ललन कुमार पासवान ने लालू प्रसाद के खिलाफ दर्ज कराई प्राथमिकी, IG ने जांच के दिए आदेश

भूख से बच्ची की मौत के मुद्दे पर राज्य सरकार के खाद्य व आपूर्ति मंत्री ने जांच कराने की बात कही है. मीडिया रिपोर्ट्स पर यकीन करें तो राशन वाले ने बीते 8 महीने से पीड़ित परिवार को राशन देना बंद कर दिया था. ऐसा आधार से राशन कार्ड लिंक नहीं होने की वजह से किया गया. इसपर भी झारखंड के खाद्य आपूर्ति मंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने ऐसा निर्देश दिया हुआ है कि जिन लोगों का राशन कार्ड उनके आधार कार्ड से लिंक नहीं है उन्हें भी राशन वितरित किए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता है.

सरकार के पास जो सूची मौजूद है उसमें गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रहे संतोष के परिवार के पास कोई नौकरी नहीं है, स्थायी आमदनी का भी कोई जरिया इनके पास नहीं है. संतोष की मां लोगों के घर में काम करके गुजर-बसर की कमाई करती है. वह पिछले कई दिनों से कहीं आ जा नहीं पा रही थी. दुर्भाग्य यहीं खत्म नहीं होता. उसके पिता मानसिक रूप से बीमार है. इस अवस्था में पूरा परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मिलने वाले सरकारी राशन पर निर्भर था. लेकिन सरकारी नियम पर नहीं चलने से उन्हें इसका लाभ मिल नहीं सका. खबरों में बताया गया है कि संतोष को मिड डे मील से भोजन मिल जाता था लेकिन उन दिनों (28 सितंबर के दरमियान) दशहरे का अवकाश था और स्कूलों में छुट्टी थी.