हाल ही में सामने आई एक ग्लोबल स्टडी ने ये दावा किया है कि वर्क फ्रॉम ऑफिस मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा बेहतर है. इस दौरान अपने सहकर्मियों के साथ अच्छे संबंध मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाते हैं. इस स्टडी में ये भी कहा गया है कि दिन-प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाले कारक जैसे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ और सबसे भी ज्यादा जरूरी है कि ऑफिस में लोगों से कैसे संबंध हैं.
ग्लोबल स्टडी में पाया गया कि देश के कार्यालय में काम करने वालों के मानसिक स्वास्थ्य संकेतक उन लोगों की तुलना में बेहतर थे जो घर से काम करते थे या हाइब्रिड व्यवस्था में काम करते थे. ये अमेरिका और यूरोप के विपरीत था, जहां हाइब्रिड कार्यकर्ताओं के मानसिक स्वास्थ्य सूचकांक सबसे अच्छे पाए गए थे.
अध्ययन, वर्क कल्चर एंड मेंटल वेलबीइंग, अमेरिका स्थित मन अनुसंधान संगठन, साइपियंस लैब्स द्वारा किया गया था, जिसने इस वर्ष 65 देशों में 54,831 रोजगार प्राप्त, इंटरनेट-सक्षम उत्तरदाताओं से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया था.
रिपोर्ट भारत में उच्च कार्यभार, तनाव और ‘विषाक्त’ कार्यस्थलों पर हाल ही में पुणे में 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मृत्यु से शुरू हुई बहस की पृष्ठभूमि में आती है. रिपोर्ट ने कार्यभार को श्रमिकों के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण कारण बताया है. लेकिन इन ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ कारकों को कुछ अन्य मापदंडों की तुलना में मानसिक स्वास्थ्य पर आधा प्रभावशाली पाया गया.
‘अपने सहकर्मियों के साथ संबंध और अपने काम में गर्व और उद्देश्य की भावना रखना आप जो भी प्रकार का काम करते हैं, उसके बावजूद मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के मामले में सूची में सबसे ऊपर आता है,’ रिपोर्ट में कहा गया है. काम पर खराब संबंध और गर्व और उद्देश्य की कम भावना दुख या निराशा की गंभीर भावनाओं, अवांछित होने और ऊर्जा स्तर और प्रेरणा में कमी से जुड़ी पाई गई.
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