नई दिल्ली: प्रमोद सावंत के रूप में गोवा के नए सीएम का चुनाव कर लिया गया है. प्रमोद सावंत ने शपथ ग्रहण कर ली है. प्रमोद सावंत ऐसे नेता हैं, जिन्होंने आयुर्वेद के डॉक्टर बनने से लेकर, संघ के कार्यकर्त्ता होने के साथ ही विधानसभा स्पीकर बनने का सफर तय करने के बाद सीएम की कुर्सी हासिल की है. इसके बाद भी उन्होंने लोगों से हाथ जोड़कर इंकार किया है कि उन्हें कोई बधाई या फूल न दे. मनोहर पर्रिकर के निधन से खाली हुए पद की कुर्सी हासिल करने वाले प्रमोद सावंत जब कार्यालय में बैठे तो पर्रिकर को नहीं भूले. उन्होंने कार्यालय में पहले दिन अपने बगल में एक और कुर्सी डलवाई और उस पर मनोहर पर्रिकर की तस्वीर रखवाई.

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अब तक गोवा की विधानसभा के स्पीकर रहे प्रमोद सावंत का सीएम के रूप में आज पहला दिन है. सीएम की कुर्सी तक पहुंचना अलग बात होती है, लेकिन सावंत को दो दिन पहले तक अंदाज़ा नहीं था, उन्हें ये जिम्मेदारी मिल जाएगी. देर रात उनका नाम फाइनल हुआ और रात में ही शपथ ग्रहण हो गई. आज कार्यालय पहुंचे प्रमोद सावंत ने कुर्सी संभाली, लेकिन वह किसी न किसी रूप में मनोहर पर्रिकर को साथ बनाए रहे. उन्होंने अपनी कुर्सी के बगल में एक और कुर्सी डलवाई और उस पर मनोहर पर्रिकर की तस्वीर रखवाई. वह लोगों और मीडिया से बगल में रखी मनोहर पर्रिकर की तस्वीर के साथ ही मिले. प्रमोद सावंत ने सभी से निवेदन किया कि उन्हें कोई बधाई न दे, न ही उन्हें लिए फूल देने आए. कम से कम सात दिनों तक ऐसा न करें. ये शोक के दिन हैं.

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इसके साथ ही प्रमोद सावंत ने कहा कि कल बुधवार (20 मार्च) को हम बीजेपी सरकार के फ्लोर टेस्ट के लिए जा रहे हैं. अभी इम्तेहान की घड़ी है. बता दें कि भाजपा में सावंत के राजनीतिक करियर की शुरुआत युवा नेता के रूप में हुई थी. वह दिवंगत पर्रिकर के पक्के समर्थक थे और उन्होंने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया. सावंत ने 2012 और 2017 में उत्तरी गोवा के संखालिम विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की थी जो कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था. वह भाजपा के उन गिने चुने विधायकों में से हैं जो दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से दोबारा विजयी हुए थे.

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राज्य में बीजेपी के पास 13 विधायक हैं. जबकि 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं. कांग्रेस एक दिन पहले 16 मार्च को ही सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है. कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की थी. वहीं, बीजेपी ने अल्पमत की बातों को खारिज किया था.