नई दिल्ली: बंबई हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की सेहत पर बुधवार को एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा. पर्रिकर (62) नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से छुट्टी मिलने के बाद 14 अक्टूबर से अपने आवास पर अग्नाशय संबंधी बीमारी का इलाज करा रहे हैं. न्यायमूर्ति आर एम बोरडे सामाजिक कार्यकर्ता टी डीमेलो की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे.

याचिका में अदालत से गोवा के मुख्य सचिव धर्मेंद्र शर्मा को विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक पैनल से पर्रिकर के स्वास्थ्य की जांच कराने और एक मेडिकल रिपोर्ट जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था. डीमेलो ने कहा, ‘मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर करने के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा लेकिन उन्हें बुधवार तक हलफनामा दायर करने के लिए कहा गया.

वहीं दूसरी ओर पर्रिकर ने अपने निजी आवास पर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें लंबित कामों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बैठक मंडोवी नदी पर बन रहे तीसरे पुल समेत विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करने के लिए की गई थी.पर्रिकर ने इससे पहले 31 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक की थी और इसके अगले दिन पार्टी नेताओं से मुलाकात की.

मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी ने बताया, ‘पर्रिकर ने विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए और इसके लिए समय सीमा तय कर दी. सरकार के विभिन्न विभागों में बीते दो साल से रिक्तियां भरी नहीं गई हैं. पर्रिकर की बीमारी के कारण रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया को पिछले नौ महीने से रोक दिया गया है. कांग्रेस राज्य में पर्रिकर के स्थान पर ‘पूर्णकालिक’ मुख्यमंत्री की मांग कर रही है.

इससे पहले गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने कहा था कि बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की जगह किसी और को इस पद पर लाने का कोई सवाल ही नहीं है. पर्रिकर मंत्रिमंडल में सरदेसाई कृषि मंत्री हैं. सत्तारूढ़ भाजपा पहले ही कह चुकी है कि पर्रिकर शासन के मामलों को देख कर रहे हैं, भले ही उनका इलाज चल रहा है. राज्य के विपक्षी दल और कभी-कभी राज्य सरकार के सहयोगियों ने भी यह आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य कारणों से उनकी अनुपस्थिति की वजह से प्रशासन में एक तरह का ठहराव आ गया है.