पणजी: गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार को कहा कि मंगेशकर परिवार के पुरोधा और गायिका लता, आशा, उषा व गायक हृदयनाथ मंगेशकर के पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने अवसरों की कमी के चलते गोवा छोड़ा था. राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी नीति के लॉन्च के मौके पर यहां एक समारोह में पर्रिकर ने राज्य में प्रतिभाओं को मौका मिलने की आवश्यकता को रेखांकित किया. Also Read - बिग बी अमिताभ बच्चन ने ट्विटर पर शेयर की लता और आशा के बचपन की ये तस्वीर, लिखा...

उन्होंने यह भी कहा कि गोवा में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग, खासकर स्टार्ट-अप शुरू करने का घर बनने की क्षमता है. उन्होंने कहा, “केवल अवसर की आवश्यकता है, अन्यथा हमारे पास गोवा में मंगेशकर रहेंगे. उन्हें दूसरी जगह क्यों जाना पड़ा? क्योंकि अवसरों की कमी थी.” Also Read - रानू मंडल की लोकप्रियता पर लता मंगेशकर ने कहा- नकल से कोई आगे नहीं बढ़ता, भुला दी जाएंगी

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे पास बहुत सी आईटी प्रतिभाएं है जो बेंगलुरु या पुणे में (आईटी) इंजन चला रही हैं. हमें राज्य के लिए प्रतिभा पलायन को रोकने की जरूरत है.” Also Read - पीएम के शपथ ग्रहण समारोह के बाद भीड़ में फंस गई थीं आशा भोसले, फिर इस मंत्री ने की मदद

दक्षिण गोवा के मंगेशी गांव में 1900 में जन्मे दीनानाथ मंगेशकर ने देश में सबसे लोकप्रिय गायक बनने के लिए कम उम्र में ही राज्य छोड़ दिया और प्रसिद्ध मंगेशकर बहनों और हृदयनाथ मंगेशकर के पिता बने. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के पूर्व छात्र ने कहा, “लेकिन बहुत से लोग गोवा की प्रतिभाओं के बारे में नहीं जानते हैं. आप कोई भी क्षेत्र ले लीजिए. चाहे वह कला, विज्ञान, संगीत या सशस्त्र बल हो. इस छोटी सी जगह ने अपनी ताकत से परे प्रतिभा उत्पन्न की है और आईटी के लिए भी ऐसा ही है.”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को कंप्यूटर और लैपटॉप देने से पहले एक राजनीतिक एजेंडा बन गया. उन्होंने सालों पहले 2001 में इस चलन को शुरू कर दिया था. पर्रिकर ने कहा, “गोवा पहला राज्य था, जहां छात्रों को 500 रुपये की मामूली कीमत में लैपटॉप दिए गए थे. यह एक तरह से उन्हें आईटी के ज्ञान से सरोबार करने जैसा था.”