देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ऑल वेदर सड़क परियोजना में बरसात के मौसम में पहाड़ी रास्तों पर जगह-जगह होने वाले भूस्खलन को रोकने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं ताकि चारधाम यात्रा निर्बाध रूप से चलती रहे और साल भर आने वाले पर्यटकों को भी समस्या से दो चार न होना पड़े. करीब 12,000 करोड़ रूपए की इस परियोजना में कुल 53 पैकेज प्रस्तावित हैं जिनमें से अब तक 631 किलोमीटर लंबाई के 37 पैकेजों को स्वीकृति मिल चुकी है.

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बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री की यात्रा होगी अवरोधमुक्त
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित चारधाम- बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा को अवरोधमुक्त, सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरे चारधाम मार्ग पर भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील 38 स्थल चिन्हित किए गए हैं और इन स्थानों पर भूस्खलन को रोकने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. पुरानी तकनीक में पहाड़ों से दरक कर नीचे आने वाले पत्थरों और मलबे को रोकने के लिए एक सुरक्षा दीवार बनाई जाती थी जो तेज बारिश होने की स्थिति में टूट-फूट जाती थी. जिसे मरम्मत कर बार-बार ठीक करना पडता था. लेकिन अब नई तकनीक से पहाड़ का ऐसा उपचार किेया जाएगा, जिससे पहाड़ों के दरकने से पत्थर सड़क पर न आने पाएं.

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गैबियन तकनीक का होगा प्रयोग
ऑल वेदर सड़क परियोजना में लगीं मुख्य निर्माण एजेंसी राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता हरि ओम शर्मा ने बताया कि इस परियोजना में चिन्हित स्लाइड जोन को रोकने के लिए गैबियन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें सुरक्षा दीवार बनाने के बाद पहाड़ों की स्केलिंग करके उनमें 12 मीटर गहरे एंकर्स डाले जा रहे हैं और वायर रोप नेटिंग की जा रही है. नेटिंग के बाद उसमें हाइड्रोसीडिंग की जाएगी जिससे उस स्थान को प्राकृतिक रूप दिया जा सके. उन्होंने बताया कि एक बड़ा भूस्खलन क्षेत्र माने जाने वाले शंखरीधार में इसी विधि से उपचार किया गया है और इस मानसून सीजन में अब तक वहां से एक कंकड़ भी गिरकर नीचे नहीं आया.

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भूस्खलन की संभावना बिल्कुल नगण्य हो जाएगी
सांखरीधार के अलावा, देवप्रयाग, श्रीनगर, सिरोबगड, नंदप्रयाग, मैठाणा, बिरही, गुलाबकोटी, हेलन, गोविंदघाट-2 और गोविंदघाट-3 जैसे अन्य संवेदनशील स्थलों पर भी यही तकनीक अपनाई जा रही है शर्मा ने कहा कि ऐसे उपचार के बाद पहाड़ों से भूस्खलन की संभावना बिल्कुल नगण्य हो जाएंगी और सड़कें पूरे साल निर्बाध आवाजाही के योग्य हो जाएंगी. कुल 889 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 150 किलोमीटर लंबे टनकपुर- पिथौरागढ़ मार्ग को भी शामिल किया गया है. यह मार्ग कैलाश- मानसरोवर यात्रा का हिस्सा है जहां भूस्खलन के कारण सड़क बंद हो जाती है, यात्री फंस जाते हैं और कई बार यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ता है.

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परियोजना के लिए 40 से 42 हजार पेड़ काटे जाएंगे
परियोजना में चंबा और धरासू से यमुनोत्री के रास्ते में राडीटॉप में दो सुरंगे भी बनाई जा रही हैं. इसके अलावा शिवपुरी के पास बरसात के मौसम में जलमग्न हो जाने वाले मैरीन ड्राइव, सोनप्रयाग और मनेरी सहित तीन स्थानों पर एलीवेटेड रोड बनाने, 107 पुल बनाने और 13 जगह बाईपास बनाने की भी योजना है. इनमें 145 जगह बस और ट्रक की आवाजाही के रास्ते बनाए जाएंगे. मार्ग में 17 जगहों पर पार्किंग, टॉयलेट, शापिंग सेंटर और रेस्ट हाउस जैसी सुविधायें भी विकसित की जाएंगी. इस परियोजना के लिए 40 से 42 हजार पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें से अब तक 25-26 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं. इस संबंध में कुछ संगठनों की आपत्ति के बारे में निर्माण एजेंसी का कहना है कि पेड़ काटने के बारे में वन मंजूरी ली जा चुकी है और इस मामले में पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं है.

कस्तूरी मृग जैसे वन्य जीवों के लिए एक सुरक्षित स्थान
उत्तरकाशी जिले में सुक्की-बैंड से झाला तक प्रस्तावित ऑल वेदर रोड के निर्माण का विरोध करते हुए पर्यावरणविद राधा बहन और सुरेश भाई ने कहा कि यहां पेड़ों की देवदार जैसी दुर्लभ प्रजातियां हैं जो कस्तूरी मृग जैसे वन्य जीवों के लिए एक सुरक्षित स्थान है. सुरेश भाई ने कहा, ‘ यहां बहुत गहरे में बह रही भागीरथी नदी के आर- पार खड़ी चट्टानें भूस्खलन का क्षेत्र बनती जा रही हैं. यह प्रस्तावित मार्ग जैव विविधता और पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचाएगा.’ उन्होंने बताया कि यहां के स्थानीय लोगों ने इस संबंध में केन्द्र सरकार से लेकर जिलाधिकारी उत्तरकाशी तक को पत्र भेजे हैं.

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मलबे का सही प्रकार से निस्तारण
इस परियोजना के मलबा निस्तारण को लेकर भी सवाल खडे़ किए जा रहे हैं और मामला अदालत तक भी पहुंच गया है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पूरी परियोजना में 480 स्थानों को मलबा निस्तारण के लिए चयनित किया गया है जहां पूरे वैज्ञानिक तरीके से उसे फेंका जाएगा. शर्मा ने बताया कि इस संबंध में वन मंजूरी लेने के बाद सही तरीके से चयनित स्थानों पर ही मलबा फेंका जा रहा है. उन्होंने कहा कि मलबा फेंकने की जगहों पर जरूरत के हिसाब से सुरक्षा दीवार भी बनाई जा रही है और सुनिश्चित किया जा रहा है कि वह गिरकर नदियों में न जाए.

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प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस परियोजना समीक्षक
करीब 12,000 करोड़ रूपए की इस परियोजना में कुल 53 पैकेज प्रस्तावित हैं जिनमें से अब तक 631 किलोमीटर लंबाई के 37 पैकेजों को स्वीकृति मिल चुकी है. इन स्वीकृत पैकेजों पर 8542 करोड़ रूपए की लागत आएगी. परियोजना से जुडे़ अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वयं इसकी प्रगति की समीक्षा की जा रही है और इस पर तेज गति से काम चल रहा है जिससे यह परियोजना समय पर पूरी हो जाएगी और जल्द ही यात्रियों को ऑल वेदर सड़कों पर चलने का आनंद मिलेगा. (इनपुट भाषा)