भारतीयों के लिए खुशखबरी, इस सेक्टर में आने वाली हैं लाखों नौकरियां; यहां जानें पूरी डिटेल

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Updated Date:May 29, 2026 7:51 PM IST

भारत का बढ़ता कचरा अब बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर 2047 तक 26 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरे से नई टेक्नोलॉजी सीख रहे लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि आने वाले समय में भारत में नौकरियों का बड़ा जैकपॉट खुल सकता है. वेस्ट मैनेजमेंट और Bio-CNG जैसे सेक्टर 26 लाख से ज्यादा नई नौकरियां पैदा कर सकते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, कचरा आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है.

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Council on Energy, Environment and Water (CEEW) की स्टडी बताती है कि भारत का शहरी ऑर्गेनिक वेस्ट यानी रसोई का बचा खाना, सब्जियों का कचरा, फूल, मांस और बागवानी का कचरा मिलकर 2047 तक करीब 51 बिलियन डॉलर का बड़ा बाजार तैयार कर सकता है. अगर कचरे को सही तरीके से प्रोसेस किया जाए, तो इससे शहर साफ होंगे, प्रदूषण कम होगा और नई नौकरियों के बड़े मौके भी पैदा होंगे.

भारत हर दिन लाखों टन कचरा निकलता

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दिन लगभग 1.71 लाख टन कचरा निकलता है, जिसमें करीब आधा हिस्सा ऑर्गेनिक वेस्ट का होता है. लेकिन चिंता की बात यह है कि सिर्फ 61% कचरे का ही सही तरीके से निपटान हो पाता है. बाकी कचरा खुले मैदानों, लैंडफिल साइट्स, नालों या सड़कों पर फेंक दिया जाता है. कई जगह इसे खुले में जला भी दिया जाता है, जिससे शहरों की हवा जहरीली हो रही है. CEEW का कहना है कि खुले में कचरा जलाने से शहरों में PM2.5 प्रदूषण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बढ़ता है. इसके अलावा बिना प्रोसेस किया गया ऑर्गेनिक कचरा मीथेन गैस छोड़ता है, जो कार्बन डाइऑक्साइड से भी ज्यादा खतरनाक गैस मानी जाती है.

कचरे से बना सकते हैं CNG

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर भारत ऑर्गेनिक वेस्ट को सही तरीके से इस्तेमाल करे तो उससे कम्पोस्ट, बायोगैस और बायो-CNG बनाई जा सकती है. यही वजह है कि अब सरकार और विशेषज्ञ वेस्ट टू फ्यूल मॉडल पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. अभी भारत में करीब 96% ऑर्गेनिक वेस्ट का निपटान कम्पोस्टिंग से होता है, जबकि बायोमेथनेशन का हिस्सा सिर्फ 4 प्रतिशत है. विशेषज्ञों का मानना है कि बायोमेथनेशन से न सिर्फ स्वच्छ ईंधन मिलेगा, बल्कि लैंडफिल से निकलने वाली मीथेन गैस भी कम होगी. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिलेगी.

उपाय नहीं निकाला तो प्रदूषण बढ़ेगा

CEEW की स्टडी के मुताबिक, अगर भारत मौजूदा रफ्तार से ही काम करता रहा तो 2047 तक कचरे से होने वाला प्रदूषण तेजी से बढ़ेगा. लेकिन अगर सरकार और शहर तेजी से नई नीतियां लागू करें और 95 प्रतिशत ऑर्गेनिक वेस्ट को प्रोसेस किया जाए, तो देश प्रदूषण को काफी हद तक कम कर सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे बेहतर स्थिति में यह बाजार 62 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. इतना ही नहीं, इससे कार्बन उत्सर्जन में 100 मिलियन टन से ज्यादा की कमी लाई जा सकती है.

लाखों लोगों को मिल सकता है रोजगार

इन सबका बड़ा फायदा रोजगार के रूप में देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाले एक बायोमेथनेशन प्लांट में करीब 31 लोगों को नौकरी मिलती है. वहीं कम्पोस्ट प्लांट में भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है. अगर भारत बड़े स्तर पर वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करता है, तो 2047 तक इस सेक्टर में करीब 26 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो सकती हैं. इसमें कचरा कलेक्शन, प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट, मशीन ऑपरेशन, ऊर्जा उत्पादन और खाद बाजार जैसे कई क्षेत्र शामिल होंगे.

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