कोलकाता: पिछले कई महीनों से तीसरे मोर्चे की कवायद से जुड़ी रहीं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एक बार फिर से नए सियासी रुख का इशारा अपने बयान में किया है. टीएससी प्रमुख ममता ने कहा कि वह केंद्र में भाजपा नीत सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने के खिलाफ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार सौ हिटलर की तरह बर्ताव कर रही है. तृणमूल अध्यक्ष ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनके यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कभी काम नहीं किया. उन्होंने राहुल को काफी जूनियर बताया. Also Read - सीएम योगी ने बंगाल में कहा- सरकार आई तो 24 घंटे में बंद होंगे बूचड़खाने, गर्व से कहो हम हिंदू हैं

बता दें कि ममता ने संघीय मोर्चा का विचार पेश किया था. वह बीजेपी के खिलाफ मजबूत विपक्षी गठबंधन तैयार करने के लिए कई प्रभावशाली नेताओं से मिल रही हैं. उन्होंने केंद्र की बीजेपी नीत सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, ” वे अत्याचार कर रहे हैं. यातना दे रहे हैं. यहां तक कि बीजेवी के कुछ नेता भी उनका समर्थन नहीं कर रहे हैं. वे सौ हिटलरों की तरह बर्ताव कर रहे हैं.” Also Read - WB Polls 2021: ममता बनर्जी से मिले Tejashwi Yadav, बंगाल चुनाव में TMC के समर्थन का किया ऐलान

राहुल के बारे में नहीं कह सकती, वे काफी जूनियर हैं
ममता ने कहा कि उन्हें किसी के साथ भी काम करने में तब तक कोई समस्या नहीं है जब तक कि उनकी मंशा और दर्शन साफ हो. कांग्रेस नेतृत्व के साथ संबंधों के बारे में पूछे जाने पर बनर्जी ने कहा, ”मैं राजीव जी या सोनिया जी के बारे में जो कह सकती हूं, वो राहुल के बारे में नहीं कह सकती, क्योंकि वह काफी जूनियर हैं.” Also Read - West Bengal Assembly Elections 2021 Opinion Poll: बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार! लेकिन 3 से 100 पर पहुंच सकती है भाजपा; जानिए क्या है जनता का मूड

पीएम बनने के सवाल पर बोली- ऐसी मंशा नहीं
‘इंडिया टुडे’ को दिए गए इंटरव्यू में पीएम बनने के सवाल पर ममता ने कहा, ”मैं. यह बेहद नासमझी भरा सवाल है. पहले मैं कहना चाहूंगी कि मेरी कोई मंशा नहीं है. मैंने आपको बताया कि मैं एक साधारण व्यक्ति हूं और अपने काम से खुश हूं. लेकिन हम एक सामूहिक परिवार के सदस्य के तौर पर सबकी मदद चाहते हैं. पीएम पद के उम्मीदवार की तैयारी की बजाय हमें साथ मिलकर काम करना चाहिए.” खुद को दौड़ से अलग करने के सवाल पर उन्होंने कहा, ”किसी चीज से इंकार करने वाली मैं कौन होती हूं. मैं जानती हूं कि मैं बेहद अनुभवी नेता और संघर्षों के बाद काफी वरिष्ठ नेता हूं. मैं सात बार सांसद रही हूं, दो बार विधायक और दो बार से मुख्यमंत्री हूं. इसलिए, मैं ऐसा कुछ नहीं कह सकती जो दूसरों को पसंद नहीं हो.”

कांग्रेस से मुझे समस्या नहीं, कुछ पार्टियां नहीं करती समर्थन
कांग्रेस के साथ काम करने या तालमेल करने के सवाल पर टीएमसी चीफ ने कहा, ”मुझे कोई समस्या नहीं है. मेरी मंशा सबको एकजुट करने की है. लेकिन यह मेरा अकेले का फैसला नहीं है. यह सभी क्षेत्रीय दलों को फैसला होना चाहिए. मुझे किसी के साथ भी काम करने में समस्या नहीं है जब तक कि वे सक्षम हैं और उनकी मंशा, उनका दर्शन और उनकी विचारधारा स्पष्ट है.” सीएम बनर्जी ने कहा कि कुछ पार्टियां कांग्रेस का समर्थन नहीं करती हैं, क्योंकि उनकी अपनी क्षेत्रीय मजबूरियां हैं.

कांग्रेस- क्षेत्रीय दलों के साथ बीच में अटका रुख
टीएमसी चीफ ने कहा, ” मैं उनपर दोषारोपण नहीं करती हूं. मेरा कहना है कि भाजपा के खिलाफ मिलकर काम करते हैं. अगर कांग्रेस मजबूत है और कुछ स्थानों पर अधिक सीट पाती है, तो उसे अगुवाई करने दें. अगर क्षेत्रीय दल किसी और जगह एकसाथ हैं तो वे निर्णय करने वाले हो सकते हैं.”

राहुल गांधी ने पार्टी के नेताओं से ली थी राय
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की थी. उन्होंने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की राज्य इकाई को मजबूत बनाने और आगे के रास्ते के बारे में उनकी राय जाननी चाही. कांग्रेस नेताओं के एक हिस्से ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ गठजोड़ के प्रति झुकाव दिखाया है. पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं. पीसीसी प्रमुख अधीर रंजन चौधरी हालांकि, तृणमूल के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं.

तृणमूल प्रमुख बोली- विपक्षी पार्टियों का महागठबंधन संभव
बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की ओर से साझा उम्मीदवार उतारने के उनके विचार के बारे में उन्होंने कहा, ” मैं वह बात नहीं कह रही हूं. अगर ऐसा 75 सीटों पर किया गया तो खेल खत्म हो जाएगा. अगर मायावती और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में साथ मिलकर काम करते हैं, तो खेल खत्म हो जाएगा. तब चुनाव के बाद न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है. यह बड़ा परिवार है. इसलिए सामूहिक फैसला होने दें.” (इनपुट- एजेंसी)