नई दिल्ली: गूगल ने गुरुवार को कात्सुको सारुहाशी को डूडल समर्पित किया है. कात्सुको सारुहाशी जापानी वैज्ञानिक थीं, जिन्होंने समुद्री जल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर का पता लगाया था. यह खोज उनके सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक था.Also Read - Google Doodle: गूगल ने एक बार फिर बनाया कोरोना का डूडल, मिलेगी नजदीकी वैक्सीनेशन सेंटर समेत कई अहम जानकारियां

Also Read - Google Doodle: गूगल ने जारी किया साल का ​आखिरी डूडल 'New Year's Eve' जानिए क्या है इसमें खास मैसेज?

सारुहाशी ने अपने शोध के आधार पर यह भी साबित किया कि रेडियोएक्टिविटी का असर पूरी दुनिया पर होता है. बाद में सारुहाशी ने एसिड रेन यानी कि अम्ल वर्षा और उसके असर पर भी काम किया. गूगल ने सारुहाशी का उल्लेख करते हुए लिखा है कि आज सारुहाशी का 98वां जन्मदिन है. विज्ञान में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए और दुनिया हर युवा वैज्ञानिक को प्रेरित करने के लिए हम उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं. Also Read - Happy Birthday Google: आज Google मना रहा है अपना 23वां जन्मदिन, Doodle ने पेश किया खास केक

गूगल ने लिखा है कि वह दुनिया की पहली वैज्ञानिक थीं, जिन्होंने तापमान के आधार पर पानी में बढ़ते कार्बोनिक एसिड का पता लगाया था. इसके अलावा तापमान के आधार पर पानी में खासतौर से समुद्री पानी में बढ़ने वाला pH लेवल और क्लोरिन के बारे में पता लगाया था. उनके जाने के बाद इस पद्धति को सारुहाशी टेबल का नाम दिया गया. उन्होंने एक ऐसी तकनीक का विकास भी किया, जिससे यह पता किया जा सका कि समुद्र में रेडियोएक्टिव कैसे एक जगह से दूसरी जगह तक फैलता है. इस खोज के बाद ही साल 1963 में समुद्री न्यूक्लियर एक्सपेरिमेंट को रोक दिया गया था.

सारुहाशी को कई सम्मान और अवॉर्ड से नवाजा गया. उन्होंने सोसाइटी ऑफ जैपनीज वुमेन साइंटिस्ट की स्थापना की ताकि विज्ञान के क्षेत्र में वह आगे आएं और दुनिया में शांति फैलाना का काम करें. सारुहाशी जियोकेमीकल लैबोरेटरी की निदेशक भी थीं. साइंस काउंसिल ऑफ जापान में नियुक्त होने वाली वह पहली महिला वैज्ञानिक थीं. दुनिया में शांति फैलाने के लिए न्यूक्लियर पावर का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर शोध करने के लिए उन्हें अवोन स्पेशल प्राइज फॉर वुमेन से नवाजा गया था.

साल 1981 में उन्होंने सारुहाशी प्राइज देने की शुरुआत की. यह अवॉर्ड महिला वैज्ञानिकों को साल में एक बार दिया जाता था. Miyake Prize जीतने वाली वह पहली महिला वैज्ञानिक थीं. सारुहाशी का 29 सितंबर 2007 को 87 साल की उम्र में देहांत हो गया.