दान के करोड़ों, चांदी के सैकड़ों किलो… गोपाल शरण गर्ग पर गबन और जमीन कब्जे के गंभीर आरोप

अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग (Gopal Sharan Garg) पर करोड़ों की नकदी और सैकड़ों किलो चांदी के गबन के आरोप लगे हैं.

Published date india.com Updated: April 20, 2026 11:06 AM IST
दान के करोड़ों, चांदी के सैकड़ों किलो… गोपाल शरण गर्ग पर गबन और जमीन कब्जे के गंभीर आरोप

Allegation on Gopal Sharan Garg: देश के प्रमुख सामाजिक संगठनों में गिने जाने वाले अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल शरण गर्ग पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. आरोपों में करोड़ों रुपये की नकदी और सैकड़ों किलो चांदी के गबन के साथ-साथ संस्था की जमीन पर कब्जे की कोशिश भी शामिल है.

ये आरोप संगठन के आजीवन सदस्य सत्यनारायण मित्तल ने लगाए हैं, जिन्होंने इस मामले में कई दस्तावेज भी सामने रखने का दावा किया है. मित्तल का कहना है कि संस्था के नाम पर देशभर से बड़ी मात्रा में चंदा जुटाया गया, लेकिन उस राशि को आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं किया गया.

लाखों रुपये और चांदी के गबन का आरोप

जानकारी के मुताबिक, मंदिर निर्माण और सामाजिक गतिविधियों के नाम पर लोगों से लाखों रुपये और चांदी का दान लिया गया. कई दानदाताओं ने 5 से 11 लाख रुपये तक का योगदान दिया. इसके अलावा, मंदिर में चांदी चढ़ाने के नाम पर भी भारी मात्रा में चांदी एकत्र की गई. आरोप है कि करीब 197 किलो चांदी दान में मिली, लेकिन उसका कोई स्पष्ट हिसाब संस्था के रिकॉर्ड में नहीं है.

और भी कई गंभीर आरोप

मित्तल ने ये भी आरोप लगाया कि दान की रकम को हवाला के जरिए इधर-उधर भेजा गया. उनके मुताबिक, केवल असम से ही एक बार में लगभग 75 लाख रुपये हवाला के माध्यम से भेजे गए. ये भी दावा किया गया है कि चांदी को बेचकर उसकी रकम को भी इसी तरह ट्रांसफर किया गया. विवाद केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है. आरोप है कि गोपाल गर्ग ने संगठन के नियमों में बदलाव कर अपने कार्यकाल को अवैध रूप से बढ़ा लिया. साथ ही, अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अहम पदों पर नियुक्त कर संगठन के संचालन पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की.

मित्तल के अनुसार, संगठन में चुनाव प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं रही. उन्होंने आरोप लगाया कि कई पदाधिकारियों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया, ताकि चुनाव परिणाम पहले से तय किए जा सकें. इस मुद्दे पर उन्होंने पहले भी कई बार लिखित रूप से जवाब मांगा, लेकिन उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. इस पूरे मामले ने संगठन के अंदर और बाहर दोनों जगह हलचल मचा दी है. हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक गोपाल शरण की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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