लखनऊ. उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटों पर उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. इन दोनों जगहों पर 11 मार्च को मतदान होना है. जबकि चुनाव परिणाम 14 मार्च को आएंगा. ऐसे में सभी पार्टियों ने चुनाव में जीत हासिल करने के लिए कमर कस ली है. ये उप चुनाव जहां भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है, वहीं अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिहाज़ से भी अहम है. माना जा रहा है कि दोनों सीटों का चुनाव परिणाम तय करेगा की कि प्रदेश में मोदी लहर की हकीकत क्या है? Also Read - UP पुलिस ने पूर्व एमपी धनंजय सिंह की तलाश में लखनऊ से दिल्ली तक छापे मारे

गोरखपुर की लोकसभा सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफा देने के बाद से खाली हुई है. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ विधान परिषद के सदस्य हैं. गोरखपुर परपंरागत रूप से बीजेपी की सीट है. 1989 से बीजेपी के कब्जे में ये सीट है. योगी आदित्यनाथ पांच बार सांसद चुने गए. इससे पहले तीन बार महंत अवैद्यनाथ सांसद थे. जाहिर यहां का समीकरण बीजेपी के पक्ष में लगातार रहा है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री की साख दांव पर है. 2014 में योगी आदित्यनाथ ने तीन लाख से ज्यादा वोट से इस सीट पर विजय दर्ज की थी. वहीं फूलपुर लोकसभा सीट बीजेपी के लिए पहली बार 2014 में केशव मौर्य ने जीता. इसी का नतीजा था कि जीत के बाद केशव मौर्या का पार्टी में कद भी बढ़ा और प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए गए. लेकिन फूलपुर में विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लोकसभा के मुकाबले कम वोट मिले थे. इसके चलते मौजूदा समय में बीजेपी परेशान है. इसलिए फिर से पिछड़े उम्मीदवार पर दांव लगाया गया है. केशव प्रसाद मौर्या को 2014 में तीन लाख से ज्यादा वोट से जीत मिली थी. Also Read - UP Panchayat Chunav 2021: गैंगस्‍टर विकास दुबे की पत्‍नी लड़ सकती है जिला पंचायत सदस्‍य का चुनाव

फूलपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का रहा है दबदबा
कांग्रेस पार्टी के लिए भी यह उपचुनाव खासा महत्वपूर्ण है. फूलपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस का पुराना नाता है. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 1952 में इसी सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे थे. इसके बाद उन्होंने साल 1952, 1957 और 1962 में लगातार तीन बार इस सीट पर जीत का परचम लहराया. पंडित जवाहर लाल नेहरू का जलवा यह था कि साल 1962 में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस को हराने के लिए यहां से ख़ुद चुनाव लड़ा और शिकस्त खाई. पंडित जवाहर लाल नेहरू की वजह से ही यह सीट बेहद ख़ास हो गई. पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने यहां से साल 1964 का उपचुनाव जीतकर सांसद बनीं. उन्होंने साल 1967 में भी यहां से जीत दर्ज की. संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि बनने के बाद साल 1969 में उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया. यहां हुए उपचुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार जनेश्वर मिश्र ने जीत हासिल की. Also Read - Honour Killing in UP : बेटी के प्रेम प्रसंग से गुस्‍साया पिता सिर काटकर लिए हुए पुलिस थाने पहुंचा

विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 1971 में यहां से जीता था चुनाव
1971 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने यहां से चुनाव जीता. साल 1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की उम्मीदवार कमला बहुगुणा ने जीत हासिल की, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गईं. साल 1980 के चुनाव में लोकदल के उम्मीदवार बीडी सिंह ने यहां से चुनाव जीता. साल 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के रामपूजन पटेल ने यहां से जीत दर्ज की. बाद में वह जनता दल में चले गए और साल 1989 और 1991 में भी उन्होंने जीत हासिल की. साल 1996 और 1998 के आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के जंग बहादुर ने यहां से चुनाव जीता. साल 1999 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के ही धर्मराज पटेल और साल 2004 के आम चुनाव में बाहुबली अतीक़ अहमद ने यहां से जीत का परचम लहराया. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में यह सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में चली गई. यहां से बहुजन समाज पार्टी के कपिल मुनि करवरिया ने जीत दर्ज की. यह जीत बहुजन समाज पार्टी के लिए इसलिए भी बहुत ख़ास थी, क्योंकि पार्टी के संस्थापक कांशीराम यह सीट हार गए थे. कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले फूलपुर लोकसभा क्षेत्र में पहली बार साल 2014 में केशव प्रसाद मौर्य ने जीत हासिल करके इसे भारतीय जनता पार्टी की झोली में डाल दिया.

उपचुनाव से जुड़ी तारीखें
यूपी में दो लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने हैं. गोरखपुर लोकसभा सीट योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के कारण इस्तीफा देने और फूलपुर लोकसभा सीट उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के त्यागपत्र दिये जाने की वजह से खाली हुई हैं. इन सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान 11 मार्च को होना है. परिणाम 14 मार्च को घोषित होंगे.

कौन हैं बीजेपी उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर से उपेंद्र शुक्ला और फूलपुर से कौशलेंद्र सिंह पटेल को उम्मीदवार बनाया गया है. माना जा रहा है कि पार्टी ने अपनी समझ से अगड़े-पिछड़े समीकरण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्याशी उतारे हैं.

सपा ने इनको उतारा
उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. गोरखपुर से प्रवीण निषाद को पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया और फूलपुर सीट से नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल मैदान में उतारा है. प्रवीण ‘निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल’ (निषाद पार्टी) के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे हैं, जो सपा में शामिल हो गए हैं. वहीं, फूलपुर सीट से उम्मीदवार नागेन्द्र पटेल पूर्व में सपा की राज्य कार्यकारिणी में रह चुके हैं.

कांग्रेस ने खेला इन पर दांव
कांग्रेस ने भी गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने डॉक्टर सुरहिता करीम को गोरखपुर और मनीष मिश्रा को फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है. सुरहिता जानी मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने साल 2012 में गोरखपुर के महापौर पद का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें वह दूसरे स्थान पर रही थीं.