दार्जिलिंग। अनिश्चितकालीन बंद के 11 वें दिन दार्जिलिंग में हिंसा और तनाव की स्थिती बरकरार है लेकिन इस बीच खबर यह भी है कि ईद के खास मौके पर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा यानी जीजेएम ने मुस्लिमों के लिए 12 घंटे की ढील देने का फैसला किया ताकि वे ईद मना सकें. अपने आंदोलन के दौरान बड़ा फैसला लेते जीजेएम नेतृत्व ने पहाड़ी में चेन-ओ-अमन से ईद मनाने के लिय मुस्लिम समुदाय को 12 घंटे की ढील दी है. Also Read - Aadhaar PVC Card: जानिए-UIDAI ने एक ही मोबाइल नंबर से पूरे परिवार के लिए क्यों शुरू की आधार कार्ड ऑर्डर करने की ऑनलाइन सुविधा

इस मामले में जानकारी देते हुए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पहाड़ियों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को को ईद के दिन सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक 12 घंटे की ढील दी गई है ताकि वे ईद मना सकें. मुस्लिम समुदाय के लोग स्टिकरों के साथ वाहनों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं जिसमें वे बता सकते हैं कि वे किस उद्देश्य से मैदानी इलाकों में जा रहे हैं और अपने रिश्तेदारों से मिल सकते हैं. Also Read - नेशनल कॉन्फ्रेंस का दावा- फारूक अब्दुल्ला को नमाज पढ़ने के लिए घर से बाहर जाने से रोका गया

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जीजेएम के नेता ने कहा कि ईद के लिए हमने आंदोलन में हमारी ओर से ढील दी गई है लेकिन इस दौरान दुकान और बाजार बंद रहेंगे और कोई भी कार न तो दार्जिलिंग में आ सकेगी और न ही बाहर जा सकेगी. बंद वैसे ही जारी रहेगा, जैसे पिछले 10 दिनों से चल रहा है.  जीजेएम ने पहाड़ियों के बोर्डगि स्कूलों के लिये भी इसी तरह 12 घंटे के बंद में ढील दी थी जिससे फंसे हुए बच्चों को वहां से निकाला जा सके.

वहीं इस बीच खबर यह भी है कि सिंघमारी स्थित जीजेएम मुख्यालय को एक बार फिर से खोल दिया गया है. गौरतलब है कि 15 जून को पुलिस छापेमारी के बाद से जीजेएम का यह मुख्यालय बंद था. जीजेएम के वरिष्ठ नेताओं और समर्थकों ने चौक बाजार से जीजेएम मुख्यालय तक रैली निकाली और ‘हम गोरखालैंड चाहते हैं’ के नारों के साथ इसे एक बार फिर से खोला.

इसके अलावा जीजेएम समर्थकों ने पहाड़ी में निकाले जा रहे अन्य जुलूसों में भी हिस्सा लिया. अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज 12वां दिन है. आंदोलनकारी पश्चिम बंगाल से अलग हटकर गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं.

एक वीडियो मैसेज के माध्यम से जीजेएम प्रमुख गुरंग ने रविवार की रात लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की. साथ ही उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा है कि दूसरे दलों के नेता गोरखालैंड आंदोलन के साथ विश्वासघात करने का प्रयास कर सकते हैं.