मोदी 3.0 कैबिनेट का हिस्सा बने शिवराज, जीतनराम मांझी, मनोहर लाल खट्टर समेत ये 6 पूर्व मुख्यमंत्री

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों में पूर्ण बहुमत आने के बाद एनडीए ने अपनी सरकार बना ली है.  रविवार (9 जून) को नरेंद्र मोदी ने अपने नए मंत्रिमंडल के साथ शपथ ग्रहण की. पीएम मोदी की कैबिनेट में इस बार कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को जगह दी गई है जिनमें मनोहर लाल, जीतन राम मांझी और शिवराज सिंह चौहान जैसे कई बड़े चेहरे शामिल हैं.

Published date india.com Published: June 10, 2024 10:12 AM IST
मोदी 3.0 कैबिनेट का हिस्सा बने शिवराज, जीतनराम मांझी, मनोहर लाल खट्टर समेत ये 6 पूर्व मुख्यमंत्री

Modi 3. 0 Cabinet:  लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे घोषित होने के बाद एनडीए ने पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में अपनी सरकार बना ली है.  रविवार (9 जून) की शाम को 71 सांसदों ने पीएम मोदी समेत मंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण की. इसमें कुल 30 सांसदों को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है.  5 सांसद स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री बनाए गए. वहीं 36 सांसदों को राज्य मंत्री बनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3.0 की कैबिनेट  में इस बार 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को जगह दी गई है.

जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को कैबिनेट में जगह मिली है उनमें मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह, हरियाणा के पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर , असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल, कर्नाटक के पूर्व सीएम एच डी कुमारस्वामी और बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी शामिल हैं. जिन 6 पूर्व मुख्यमंत्री को मोदी 3.0 मंत्रिमंडल में जगह दी गई है उनमें 4 पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी से हैं. इसके अलावा कर्नाटक के पूर्व सीएम कुमारस्वामी जनता दल-सेक्युलर से हैं वहीं  मांझी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से हैं. चलिए जानते हैं इन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बारे में-

राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह का बीजेपी के साथ सफर दशकों का है. राजनाथ सिंह ने साल 1974 में राजनीति में अपने करियर की शुरूआत की और साल 1977 में वे पहली बार विधायक बने. साल 1991 में राजनाथ सिंह को यूपी का शिक्षा मंत्री बनाया गया.  साल 1994 में वे राज्यसभा सांसद चुने गए. राजनाथ सिंह को साल 1999 में केंद्रीय परिवहन मंत्री बनाया गया जिसमें की उन्होंने  अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे डेवलेपमेंट प्रोग्राम (NHDP) पर काम किया. इसके बाद साल 2000 में उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया.

शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान साल 2005 से 2018 के बीच लगातार तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में सबसे लंबे वक्त का मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है. शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1990 में की थी. इसके बाद साल 2000 से 2003 के बीच उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में काम किया.

मनोहर लाल खट्टर

मनोहर लाल खट्टर को हमेशा से ही आरएसएस का प्रचारक माना गया है. साल 1977 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. इसके बाद साल 2000 से 2014 के बीच वे हरियाणा में बीजेपी के महासचिव रहे.  इसके बाद साल 2014 में उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से नवाजा गया. इसी के साथ मनोहर लाल खट्टर ने करीब 10 सालों तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की.

सर्बानंद सोनोवाल

सर्बानंद सोनोवाल को साल 2016 असम के विधानसभा चुनाव में जितने के बाद असम के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया और सर्बानंद सोनोवाल केंद्र सरकार में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री और आयुष मंत्री रहे हैं. सोनोवाला ने पहले 2012 से 2014 तक, बाद में साल 2015 से 2016 के बीच बीजेपी के असम राज्य अध्यक्ष के रूप में कार्य किया.  इसके बाद उन्होंने साल 2014 से 2016 के बीच भारत सरकार के खेल और युवा मंत्री के रूप में भी काम किया.

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एचडी कुमारस्वामी

एनडीए कुमारस्वामी साल 2006 से 2007 के बीच और 2018 से 2019 के बीच दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं. वे कर्नाटक के लोगों के बीच कुमारन्ना नाम से जाने जाते हैं. उन्होंने मांड्या लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर, रविवार को उन्होंने जनता कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है.

जीतन राम मांझी

बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी भी मोदी सरकार में पहली बार मंत्री बनाया गया है. साल 1980 में कांग्रेस से टिकट मिलने के बाद  वो लगातार राजनीति में सक्रिय रहे हैं. अपने 44 साल के पॉलिटिकल करियर में जीतन राम मांझी  तीन दल बदल चुके हैं पहले वे जनता दल से जुड़े बाद में राष्ट्रीय जनता दल और फिर जेडीयू जैसे दलों में रहे हैं. जीतन राम मांझी साल 2014 में बिहार के मुख्यमंत्री चुने गए लेकिन 10 महीने बाद ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

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