नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को देश के लिए शहीद होने वाले सैन्य कर्मियों के बच्चों के लिए एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने सेवा के दौरान शहीद होने वाले सैन्य कर्मियों के बच्चों के शिक्षा शुल्क भुगतान की 10,000 की सीमा को हटा दिया है. अब केंद्र सरकार शहीद होने वाले सैनिकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी. रक्षा मंत्रालय के पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा 13 सितंबर, 2017 के आदेश के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के तहत शहीदों के बच्चों के लिए ट्यशन व हॉस्टल खर्चो के लिए 10,000 प्रति माह की शुल्क सीमा लगाई थी जिसे अब हटा दिया गया है. यह आदेश एक जुलाई 2017 से प्रभावी था. पंजाब के चीफ मिनिस्टर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को लिमिट तय करने का फैसला वापस लेने का अनुरोध किया था. Also Read - अगले महीने होगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 5 अस्थाई सीटों के लिए मतदान, भारत को सीट मिलना तय

इस संबंध में 21 मार्च, 2018 के आदेश में कहा गया है कि सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों, सैन्य विद्यालयों, दूसरे स्कूलों व केंद्र या राज्य सरकारों के मान्यता प्राप्त संस्थानों व स्वायत्तशासी संस्थानों में अध्ययन करने वालों के लिए शुल्क की सीमा को हटा दिया गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस फैसले को अपनी मंजूरी दी है. Also Read - अमेरिकी सांसद का दावा, चीन को हराना है तो भारत को 'शक्तिशाली' बनाना होगा

यह स्कीम तीनों सेनाओं के लिए है. 1971 की भारत-पाक जंग के बाद शुरुआती स्कीम सामने आई थी, इसमें ट्यूशन और अन्य फीस (हॉस्टल, किताब, यूनिफॉर्म) का पूरा खर्च मिलता सरकार उठाती थी लेकिन फिर इसकी लिमिट 10 हजार तक कर दी गई. अब सरकार ने इस लिमिट को हटा दिया है. Also Read - मोदी सरकार 2.0 का 1 साल पूरा: गृह मंत्रालय की उपलब्धियों में शामिल है लॉकडाउन, अनुच्छेद 370 समाप्त करना

राज्य सभा में जनवरी में एक लिखित उत्तर में रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था कि 2017-18 के दौरान कुल 2,679 छात्रों में से 193 छात्रों को ट्यशन व हॉस्टल शुल्क की सीमा से ज्यादा पैसे मिल रहे हैं. भामरे ने कहा था इसमें लगभग 3 करोड़ रुपये के बचत का अनुमान है.

इस निर्णय के प्रभावी होने से 2017-18 में करीब 250 छात्र प्रभावित हुए. इसके तहत एक छात्र के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 18.95 लाख रुपये की राशि निकाली जा सकती है. इस योजना की घोषणा पहली बार लोकसभा में 18 दिसंबर, 1981 को की गई थी.

(इनपुट: IANS)