नई दिल्ली: सरकार शहरी क्षेत्रों में 2022 तक सभी जरूरतमंदों को आवास सुविधा मुहैया कराने के लिये एक करोड़ सस्ते आवास बनाने की मंजिल तक पहुंचने का अब तक 12 फीसदी सफर तय कर पाई है. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत सस्ते आवास बनाने की योजना को अंजाम दे रहे केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मामलों के मंत्रालय को योजना की गति बढ़ाने के लिए अब त्वरित भवन निर्माण संबंधी 24 नई तकनीकों का सहारा है.

स्मार्ट सिटी मानकों पर अभी भी अधूरी हैं
आवास के अलावा 100 स्मार्ट शहर बनाने की योजना को आगे बढ़ा रहे मंत्रालय के पास 2018 खत्म होने तक एक भी शहर ऐसा नहीं है, जिसे स्मार्ट सिटी परियोजना के मानकों पर शत प्रतिशत खरा माना जा सके. हालांकि, मंत्रालय की दलील है कि स्मार्ट सिटी परियोजना में शहरों के स्वरूप का बदलाव चरणबद्ध तरीके से दिखना शुरू होगा.

35.67 लाख घरों का शहरी क्षेत्रों में हो रहा निर्माण
आवास योजना के बारे में मंत्रालय का दावा है कि जून 2015 में शुरू हुई इस योजना के तहत 2018-19 में आवास निर्माण की गति सबसे ज्यादा रही. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कुछ ऐसी स्थिति है-
-35.67 लाख घर शहरी क्षेत्रों में निर्माणाधीन हैं
– 12.45 लाख घरों का निर्माण पूरा हो चुका है
– इनमें से 12.19 लाख घर (12 प्रतिशत से अधिक) लाभार्थियों को आवंटित हो चुके हैं
– 1 करोड़ घरों के निर्माण को मंजूरी देने का लक्ष्य
– 2022 तक इन घरों का निर्माण करके जरूरतमंद लोगों को आवंटित किया जा सके

योजना की गति धीमी, मंत्रालय का ये है दावा
– योजना की धीमी गति के बारे में मंत्रालय ने दी ये सफाई
– प्रवक्ता राजीव जैन ने कहा कि 10 दिसंबर तक 68.5 लाख सस्ते आवास के निर्माण को मंजूरी
– इन सस्ते आवास के लिए 33,455 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए
– पिछले साढ़े तीन सालों में 11.12 लाख घर बनाए गए
– निर्माण कार्य की गति के बारे में जैन का दावा- चार साल में निर्माणकार्य की गति लगातार बढ़ी है
– यह 2015-16 में 1.20 लाख से बढ़कर 2016-17 में 1.31 लाख
– 2017-18 में 3.28 लाख और 2018-19 में 5.33 लाख हो गई
– निर्माणकार्य की रफ्तार अधिक बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने त्वरित गति से भवन निर्माण से जुड़ी 24 नई तकनीकों को चिन्हित कर इन्हें राज्य सरकारों को मुहैया कराया है.

– योजना में कोष की कमी को दूर किया
– इस योजना की 3,56,397 करोड़ रुपए की कुल लागत में से अब तक 1,00,275 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं
– मंत्रालय ने 2018 में आवास योजना के अलावा अपनी अन्य उपलब्धियों में शहरों के कायाकल्प के लिए अमृत योजना

खुले में शौच की समस्या से मुक्त के लिए शौचालय निर्माण योजना
– विरासत शहरों को संवारने के लिए हृदय परियोजना और देश को खुले में शौच की समस्या से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण योजना को भी शामिल किया है.
– स्वच्छ भारत अभियान के तहत अब तक 62 लाख घरों में निजी शौचालय और पांच लाख सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण
– 1612 स्थानीय निकायों को ओडीएफ घोषित किया गया, इस अभियान की कामयाबी का दावा
– मंत्रालय ने चार साल में 4124 स्थानीय निकायों को ओडीएफ घोषित किया
– अब तक राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और झारखंड सहित 21 राज्य पूरी तरह से ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं

स्वच्छता सर्वेक्षण को भी अहम उपलब्धि
– मंत्रालय ने शहरों को आपसी प्रतिस्पर्धा के माध्यम से साफ बनाने के लिए शुरू किए स्वच्छता सर्वेक्षण को भी अहम उपलब्धि माना है
– इसके पहले चरण में इंदौर को स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 में पहला स्थान मिला था
– वहीं, इस साल जनवरी से मार्च तक चले स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रतिभागी 4203 शहर और कस्बों में इंदौर, भोपाल और चंडीगढ़ शीर्ष तीन स्थान पर रहे

– स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 भी 13 अगस्त को शुरू हो गया है और यह अगले साल चार जनवरी तक चलेगा
– स्वच्छता के साथ मंत्रालय का पूरा जोर आवास एवं स्मार्ट सिटी परियोजना को जमीनी हकीकत बनाने पर रहा

स्मार्ट सिटी परियोजना अभी भी चुनौती 
– मंत्रालय की सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 100 शहरों को स्मार्ट बनाना अभी भी चुनौती
– परियोजना के चार चरणों में अब तक सौ शहरों का चयन कर लिया गया है

– इन शहरों को सुविधाजनक यातायात और अन्य नागरिक सुविधाओं से लैस करने के लिए अब तक 5,151 स्मार्ट प्रोजेक्ट शुरू किए गए
– शहरी यातायात को उन्नत बनाने के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई, चेन्नई, जयपुर, और लखनऊ सहित 10 शहरों में मेट्रो रेल का दायरा 536 किमी तक कर लिया गया है.

– 2018 में दिल्ली एनसीआर, चेन्नई और हैदराबाद में 110 किमी मेट्रो लाइन का काम शुरू किया गया
– मंत्रालय ने अजमेर, वाराणसी और पुरी सहित सात विरासत शहरों में हृदय परियोजना के तहत ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को दुरुस्त करने की 140.14 करोड़ रुपए की लागत वाली 20 परियोजनाओं को 2018 में पूरा करने का दावा किया.
– मंत्रालय अपनी भवन निर्माण एजेंसी केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग का कामकाज पूरी तरह से डिजिटल बनाने को भी गुजरते साल की अहम उपलब्धि मानता है.