नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को सरकार पर आर्थिक पैकेज के नाम पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र द्वारा घोषित उपाय भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का केवल 1.6 प्रतिशत हैं जो 3.22 लाख करोड़ रुपये है लेकिन प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये का दावा किया था. Also Read - भारत में लगातार अच्छा हो रहा है कोरोना मरीजों का रिकवरी रेट, मृत्यु दर घटकर 2.82% हुई: स्वास्थ्य मंत्रालय

कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘‘कथनी और करनी’’ एक समान रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उपक्रमों तथा गरीबों के हाथों में पैसे देने की घोषणा की जानी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था में फिर से नयी जान आ सके. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देना और लोगों को केवल ऋण दिए जाने के बीच अंतर है. Also Read - 1998 के बाद पहली बार मूडीज ने घटाई भारत की रेटिंग, कहा- 2020-21 में चार प्रतिशत घटेगी GDP

पूर्व केंद्रीय मंत्री शर्मा ने प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं पर सवाल उठाते हुए पैकेज पर बहस के लिए वित्तमंत्री को चुनौती दी. शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार का आर्थिक पैकेज सिर्फ 3.22 लाख करोड़ रुपये का है और यह भारत की जीडीपी का सिर्फ 1.6 प्रतिशत है और यह 20 लाख करोड़ रुपये नहीं है, जैसा प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी.” Also Read - International Sex Workers Day: क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे? कोरोना की मार झेल रही हैं भारत की 6,37,500 यौनकर्मी

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री की घोषणा पर आपत्ति जताते हुए मैं वित्त मंत्री से सवाल कर रहा हूं और सरकार को चुनौती दे रहा हूं कि वह मेरे द्वारा दिए गए आंकड़ों को खारिज करे, मैं वित्त मंत्री के साथ बहस के लिए तैयार हूं.” शर्मा ने कहा कि वित्त मंत्री को सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि सवाल पूछना चाहिए.

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार की योजना के अभाव में सड़कों पर पैदल चलने के लिए मजबूर प्रवासियों की दुर्दशा पर सरकार को देश को जवाब देना चाहिए. शर्मा ने विपक्षी पार्टी पर हमले के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा और कहा कि देश को वित्त मंत्री से कुछ गंभीरता की उम्मीद है. उन्होंने सरकार से देश के उन गरीब नागरिकों से माफी मांगने को कहा जिन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है और जिनके मौलिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन किया गया है.