नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती है. इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए सरकार इस पैसे का इस्तेमाल इनसेंटिव देने के लिए करेगी. अगर सरकार यह फैसला लेती है तो डीजल-पेट्रोल कारें 12 हाजर रुपए तक महंगी हो सकती हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक नीति आयोग ने एक नोट तैयार किया है. पहले साल इलेक्ट्रिक टू व्हीलर, थ्री व्हीलर या कार खरीदने वालों को सरकार 25 हजार से 50 हजार तक इंसेंटिव देने पर विचार कर रही है. सरकार चाहती है कि प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री घटाई जाए. इलेक्ट्रिक गाड़ियों खरीदने वालों को डायरेक्ट बेनफिट ट्रांसफर पर विचार किया जा रहा है. वहीं राज्य में ई-बस चलाने वाली कंपनियों को प्रति किलोमीटर इनसेंटिव देने पर विचार किया जा रहा है. Also Read - World Environment Day 2020 : पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या करता है भारत और उसका पड़ोसी देश चीन, पढ़ें यहां

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ड्राफ्ट के मुताबिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने वाले को सीधे इंसेन्टिव मिलेगा जिससे कोई अन्य उसका फायदा न उठा सके. सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन बिना फीस और रोड टैक्स के होगा. हालांकि कस्टम ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन बैट्री और पार्ट्स पर टैरिफ में कटौती की जाएगी. सभी पेट्रोल पंपों पर इलेक्ट्रिक चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे. एक हजार पंपों को बोली के माध्यम से सब्सिडी मिलेगी.

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इलेक्ट्रिक वाहन 2017-18 में भारत में श्रेणियों में बेचे गए 24 मिलियन वाहनों में से 1% से कम रहा, लेकिन ऐसे वाहनों के सबसे बड़े निर्माताओं महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित निर्माताओं का मानना है कि यह जल्द ही सबसे तेजी से बढ़ रहे बाजार का हिस्‍सा होगा. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन के लिए जीएसटी (माल और सेवा कर) 12% पर तय किया गया है, जबकि अन्य वाहनों के लिए 28% है.

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देश में धीरे-धीरे ही सही लेकिन हाईब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ रही है. अगर इलेक्ट्रक वाहनों को पूरी तरह अपना लिया जाता है तो सालाना 7,000 अरब रुपए के कच्चे तेल की बचत होगी. इतना ही नहीं प्रदूषण भी कम हो जाएगा. एनईएमएमपी ने 2020 तक देश में 70 लाख इलेक्ट्रिक/हाईब्रिड वाहनों का लक्ष्य रखा है. नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के मुताबिक, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए 2030 टाइमलाइन निर्धारित की है कि भारत के सभी वाहन इलेक्ट्रिक होंगे.