नई दिल्ली। लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने पर आमसहमति बनाने के लिए सरकार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है. यह बैठक विधि आयोग द्वारा इस मामले में कानूनी ढांचे की सिफारिश के बाद आयोजित की जा सकती है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर नेताओं के बीच चर्चा का दायर बढ़ाने के लिए आगामी दिनों में सर्वदलीय बैठक बुलाई जा सकती है.

एक साथ चुनाव करवाने के पक्ष में नहीं अधिकतर पार्टियां

लेकिन बैठक बुलाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. सूत्रों ने कहा कि सरकार विधि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जो दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए कानूनी ढांचा पेश करेगी. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सरकार के पास आने के बाद उस पर चर्चा के विस्तृत बिंदु होंगे. चुनाव एक साथ कराने की व्यावहारिकता की जांच कर रहे आयोग ने इससे पहले अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले राजनीतिक दलों से नजरिया पूछा था.

गौरतलब है कि मोदी सरकार पूरे देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराना चाहती है. बीजेपी नेताओं और सरकार की तरफ से कई बार कहा जा चुका है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराएं जाएं. कई दलों ने इसका समर्थन भी किया है. लेकिन विपक्षी कांग्रेस समेत कई दल इसका विरोध भी कर रहे हैं.

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ संवैधानिक ढांचे के खिलाफ, यह सिर्फ जुमला है: कांग्रेस

दूसरी ओर लोकसभा चुनाव समय से पहले कराए जाने की चर्चा के बीच कांग्रेस ने इसका विरोध किया है. पार्टी का कहना है कि एक साथ चुनाव की बात सुनने में अच्छी लगती है. लेकिन क्या यह संवैधानिक ढांचे को बरकरार रखते हुए व्यावहारिक रूप से संभव है. उसका कहना है कि यह प्रस्ताव लोकतंत्र की बुनियाद पर कुठाराघात हैं. यह जनता की इच्छा के विरुद्ध है. इसके पीछे अधिनायकवादी रवैया है.

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एसपी एक साथ चुनाव के पक्ष में है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी चाहते हैं कि दोनों चुनाव एक साथ कराए जाएं. बिहार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू ने भी इस मुद्दे पर सरकार का समर्थन किया है. तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक सिद्धांत रूप में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एकसाथ कराने के प्रस्ताव पर सहमत है. तेलंगाना राष्ट्र समिति ने भी कहा है कि उनकी पार्टी एक देश एक चुनाव पर सहमत है. हालांकि, पार्टी चाहती है कि इसपर 2021 के बाद विचार किया जाना चाहिए. उधर, तृणमूल कांग्रेस, आप, सीपीएम ने इसका विरोध किया है. सीपीआई ने संसद में चर्चा की मांग की है. टीएमसी इसे असंवैधानिक बता चुकी है. डीएमके ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि ये संविधान विरोधी होगा.  एमके स्टालिन ने लॉ कमीशन को अपने पत्र में कहा है, डीएमके का दृढ़ विचार है कि लोकसभा और विधानसभा के लिए एक साथ चुनाव कराना संविधान की मूल भावना का विरोध करने जैसा होगा.

अप्रैल में लॉ कमीशन ने कहा था कि 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराए जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए संविधान में दो महत्वपूर्ण संशोधन करने होंगे साथ ही राज्य सरकारों की भी मंजूरी जरूरी होगी. 9 जुलाई को कमीशन ने इसे लेकर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी. 2019 चुनाव से पहले ये मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है.

(भाषा इनपुट)