नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ बातचीत के बाद नए कृषि कानूनों में सुधार करने के लिए तैयार है. इससे पहले सरकार ने नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की संभावना से बृहस्पतिवार को एक तरह से इनकार कर दिया. सरकार ने किसान समूहों से इन कानूनों को लेकर उनकी चिंताओं के समाधान के लिए सरकार के प्रस्ताओं पर विचार करने की अपील की है. Also Read - कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने फिर की अपील, 'कानून निरस्त करने के अलावा विकल्प बताएं किसान यूनियन'

कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि नए कृषि सुधार कानूनों से किसान APMC मंडी में लगने वाला कमीशन देने को बाध्य नहीं होंगे. उन्हें अपनी फसल के लिए अपनी मर्जी से मंडी और दाम चुनने की पूरी आजादी होगी. Also Read - कांग्रेस का मोदी सरकार से सवाल, कितने करोड़ लोगों को कोरोना का मुफ्त टीका मिलेगा और किसको नहीं मिलेगा?

उन्होंने कहा, “पीएम ने इस बारे में (MSP) बात की थी और मैंने दोनों सदनों के पटल पर आश्वासन दिया था. यदि संसद में जो भी कहा जा रहा है, तो यह एक रिकॉर्ड किया गया दस्तावेज है. यह सरकार की मंशा को व्यक्त करता है. इससे ज्यादा शक्तिशाली कोई दस्तावेज नहीं हो सकता. एमएसपी जारी रहेगा. इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए.” Also Read - Farmers Protest: किसानों और सरकार के बीच नौवें दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा, अगली मीटिंग 19 जनवरी को

बता दें कि नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और मोदी सरकार के बीच पिछले काफी समय से गतिरोध जारी है. इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित तीन कृषि सुधार कानूनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में किसानों ने दावा किया है कि कृषि कानून “कृषि के व्यावसायीकरण और व्यावसायीकरण के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा,” और किसानों को “कॉर्पोरेट लालच के प्रति संवेदनशील बनाएगा.”

इस बीच, किसान मजदूर संघर्ष समिति के सदस्य नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली की यात्रा शुरू कर चुके हैं. किसान मजदूर संघर्ष समिति के एसएस पंधेर ने कहा, “लगभग 700 ट्रैक्टर ट्रॉलियां दिल्ली की कुंडली सीमा की ओर बढ़ रही हैं.”

सरकार ने कहा कि जब भी यूनियन चाहें, वह अपने प्रस्ताव पर खुले मन से चर्चा करने के लिए तैयार है. सरकार की अपील के बावजूद किसानों का विरोध जारी रहा और उन्हों ने धमकी दी कि वे राजमार्गों के अलावा रेलवे पटरियों को भी अवरुद्ध करेंगे.

प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लिखित आश्वासन देने के सरकार की पेशकश को ठुकराने और नए कृषि कानूनों के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने के प्रस्ताव को खारिज करने के एक दिन बाद, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसान यूनियन के नेताओं को प्रस्तावों पर विचार करना चाहिए और वह उनके साथ आगे की चर्चा के लिए तैयार है. लेकिन उन्होंने किसानों से अगले दौर की वार्ता के लिए तारीख प्रस्तावित करने जिम्मा किसान समूहों पर छोड़ दिया.