नई दिल्ली: केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को कहा कि उच्च शिक्षा में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण अगले शैक्षिक सत्र (2019-20) से लागू होगा. यह आरक्षण निजी और सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों में दिया जाएगा. जावड़ेकर ने यहां संवाददाताओं से कहा कि ऊंची जातियों के गरीबों को दिए जाने वाले इस 10 फीसदी आरक्षण का कोई भी असर अनुसूचित जाति-जनजाति के मौजूदा आरक्षण पर नहीं पड़ेगा. वह पहले की ही तरह बना रहेगा.

उन्होंने कहा कि हमारी आज (मंगलवार) एआईसीटीई और यूजीसी के अधिकारियों के साथ बैठक हुई. आर्थिक आधार पर आरक्षण 2019-20 के शैक्षिक सत्र से लागू होगा. शिक्षा संस्थानों को इस साल के अपने प्रॉस्पेक्टस में इस प्रावधान को शामिल करने के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे. जावड़ेकर ने कहा कि यह आरक्षण देश के करीब 40 हजार कॉलेजों और 900 विश्वविद्यालयों में लागू होगा.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऐलान किया कि वह शिक्षण सत्र 2019-20 से सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को लागू करेगा और देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों में करीब 25 प्रतिशत सीटें बढ़ाएगा. शिक्षण सत्र 2019-2020 से ही आरक्षण लागू हो जाएगा. करीब 25 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य श्रेणियों के तहत मौजूदा कोटा प्रभावित नहीं हो.

इससे पहले जावडेकर ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछडे लोगों को दस प्रतिशत आरक्षण के निर्णय को गरीबों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की तरफ उठाया गया क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा था कि उनके मंत्रालय ने दस प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि यह सामाजिक न्याय का ऐतिहासिक फैसला है क्योंकि समाज का एक तबका गरीबी से जूझता रहे और गरीबी के कारण पढाई नहीं कर सके, उसे नौकरियों के अवसर नहीं मिलें तो वह गलत होगा. इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह न्याय देने का काम किया.