नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी गवर्नर के सार्वजनिक तौर पर आरबीआई और सरकार के बीच विवाद को उठाने से केंद्र सरकार नाराज है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को डर है कि आरबीआई के इस कदम से निवेशकों के बीच सरकार की गलत छवि बनेगी.

बता दें कि शुक्रवार को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने आरबीआई की स्वायतत्ता को कमजोर करने की सरकारी कोशिशों पर सवाल उठाए थे. उन्होने कहा था कि इससे बाजार और देश के आर्थिक हालात पर विपरीत असर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि गवर्नर उर्जित पटेल ने उन्हें इस मुद्दे को उठाने को कहा था.

इन्होंने जताया विरोध
दूसरी तरफ ऑल इंडिया रिजर्व बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन ने कहा-देश के केंद्रीय बैंक को कमजोर करने की कोशिशों का विरोध किया जाएगा. एसोसिएशन ने कहा है कि देश के केंद्रीय बैंक को कमतर आंकना आफत को न्यौता देना होगा. इससे सरकार को निश्चित तौर पर बचना चाहिए. केंद्रीय बैंक पर दबाब बढ़ाने के बजाय दोनों पक्षों को आपस में बातचीत के जरिये मुद्दों को सुलझाना चाहिये। वह जो भी कर रहे हैं, राष्ट्र की कीमत पर कर रहे हैं.

व्यवहार में लाया जा सके अधिकार
आरबीआई के डिप्टी गर्वनर विरल आचार्य ने 27 अक्टूबर को कहा था कि जो भी सरकार केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती उसे देर-सबेर वित्तीय बाजारों की नाराजगी का सामना करना पड़ता है. विरल आचार्य ने एक स्मारक व्याख्यान में कहा था, प्रभावी स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है जिससे जो भी अधिकार (रिजर्व बैंक कानून में) दिए गए हैं उनको व्यवहार में लाया जा सके