नई दिल्ली: सामाजिक न्याय विभाग मेनहोल और सेप्टिक टैंकों की सफाई के खतरनाक काम को यांत्रिक रूप देने की आवश्यकता पर संवेदनशीलता के अपने वर्तमान अभियान को 2020 में तेज करेगा. नियमों के अनुसार सीवरों और सेप्टिक टैंकों की मजदूरों द्वारा सफाई पर रोक है लेकिन कुछ खास मामले इसके अपवाद हैं. Also Read - ऑक्सीजन और टीके का निर्यात अपराध से कम नहीं, राहुल गांधी बोले तो सरकार ने बताया झूठ, क्या है सच?

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत अबतक 468 नगर निकायों को लाया गया है और ‘‘हमारी इसे 2020 में तेज करने की योजना है.’’ नगर एजेंसियों को स्वच्छता संबंधी मशीनें खरीदने और उन्हें उपयोग में लाने के लिए स्वच्छ उद्यमी योजना के तहत उपलब्ध ऋण योजना का इस्तेमाल करने को कहा गया है. Also Read - तैयारी के लिए एक साल से ज्यादा समय था लेकिन इसके बावजूद सरकार लापरवाह रही: सोनिया गांधी

यह योजना अक्टूबर, 2014 में शुरू की गई थी जिसके तहत 50 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है. अधिकारियों ने एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मेनहोल, सेप्टिक टैंकों और अन्य सफाई का काम करते हुए 2013 से अबतक देश में 400 मजदूरों की जान गई है. Also Read - चुनावी रैलियों में मास्क जरूरी क्यों नहीं? कोरोना गाइडलाइंस की अनदेखी पर हाईकोर्ट नाराज, केंद्र और EC से मांगा जवाब