नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने विवादों में उलझे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से सारे अधिकार वापस ले लिए हैं. सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि देश की इस शीर्ष जांच एजेंसी के इतिहास में यह पहला इस तरह का मामला है. सूत्रों ने बताया कि घटनाक्रम जारी है और सरकार की ओर से विस्तृत बयान जारी करने के बाद इस मामले में स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी. सरकार अगले कुछ घंटों में बयान जारी कर सकती है. Also Read - Haryana: पूर्व CM Bhupinder Singh Hooda को CBI की स्पेशल कोर्ट से झटका, AJL प्लॉट आवंटन केस में तय हुए आरोप

एक सरकारी आदेश में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से सीबीआई निदेशक का प्रभार दिया. इस आदेश का मतलब यह है कि सरकार ने सीबीआई के पदानुक्रम में संयुक्त निदेशक से वरिष्ठ स्तर यानी अतिरिक्त निदेशक रैंक के तीन अधिकारियों को दरकिनार कर नागेश्वर राव को एजेंसी के निदेशक का प्रभार दिया. जिन तीन अतिरिक्त निदेशकों को दरकिनार किया गया उनमें ए के शर्मा भी शामिल हैं. अस्थाना की ओर से की गई शिकायत में शर्मा का नाम सामने आया था. Also Read - CBI के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा का निधन, कई अहम पदों पर कर चुके हैं कार्य

सूत्रों ने पहले बताया था कि सीबीआई मुख्यालय सील कर दिया गया है. वहां न तो सीबीआई कर्मियों और न ही बाहरी लोगों को जाने की इजाजत दी जा रही थी, क्योंकि अधिकारियों की एक टीम इमारत में थी. हालांकि, अब इमारत में प्रवेश की इजाजत दी जा रही है. Also Read - पासपोर्ट बनवाने के नाम पर रिश्वत माँगता था अफसर, CBI ने किया अरेस्ट