नई दिल्ली: भाजपा ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहित की गई 67 एकड़ जमीन मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि कहा कि केंद्र विवादित जमीन को नहीं छू रही है.केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मीडियाकर्मियों से कहा कि यह राम जन्म भूमि न्यास के उपर है कि वह लौटायी गई जमीन का क्या करती है, सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी.

बता दें कि कि केंद्र ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने के कुछ ही घंटे बाद जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, सरकार विवादित जमीन को नहीं छू रही है.

केंद्र ने 67 एकड़ भूमि मूल मालिकों को लौटाने के लिए अर्जी
केन्द्र ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति के लिए मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में अर्जी दायर की. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कदम है. केन्द्र ने इस अर्जी में कहा है कि उसने 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था और अब वह इस अतिरिक्त जमीन को उनके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति चाहता है.

अयोध्या अधिनियम, 1993 के अधिग्रहण के तहत आवेदन
आवेदन में कहा गया है, ”आवेदक (केंद्र) अयोध्या अधिनियम, 1993 के कुछ क्षेत्रों के अधिग्रहण के तहत अधिग्रहित भूमि को वापस करने/ बहाल करने/सौंपने के अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए आवेदक ने न्यायालय की अनुमति के लिए यह आवेदन दाखिल कर रहा है.”

फारुकी मामले के आधार पर मांगी स्वीकृति
केन्द्र ने उच्चतम न्यायालय के इस्माइल फारुकी मामले में फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने माना था कि अगर केन्द्र अधिग्रहित की गई सम्पत्ति को उनके मूल मालिकों को लौटाना चाहे तो वह ऐसा कर सकता है. याचिका में कहा, इस अदालत की संविधान पीठ ने माना है कि 0.313 एकड़ के विवादित क्षेत्र के अलावा अतिरिक्त क्षेत्र अपने मूल मालिकों को वापस कर दिया जाए. याचिका में कहा गया कि राम जन्मभूमि न्यास (राम मंदिर निर्माण को प्रोत्साहन देने वाला ट्रस्ट) ने 1991 में अधिग्रहित अतिरिक्त भूमि को मूल मालिकों को वापस दिए जाने की मांग की थी.

2003 के शीर्ष अदालत के फैसले में बदलाव की मांग
केंद्र कहा, एक पार्टी ‘राम जन्मभूमि न्यास’ (जिसकी लगभग 42 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है) ने इस अदालत के संविधान पीठ के फैसले पर भरोसा करते हुए एक आवेदन दायर किया है. केन्द्र ने इस नई याचिका में 2003 के शीर्ष अदालत के फैसले में बदलाव की मांग की है. उस आदेश में न्यायालय ने अधिग्रहित भूमि पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था.

1991 में केंद्र ने 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था
याचिका में कहा, ”आवेदक इस न्यायालय से संविधान पीठ के फैसले में निर्धारित कर्तव्य के निर्वहन के लिये मार्च, 2003 को दिए आदेश में उपयुक्त सुधार किया गया/वापस लिया जाए. केन्द्र सरकार ने 1991 में विवादित स्थल के पास की 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. केन्द्र ने अपनी अर्जी में कहा है कि उसे जमीन को मूल मालिकों को लौटाने में कोई आपत्ति नहीं है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में दिया था ये फैसला
शीर्ष अदालत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपील लंबित हैं. उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था. उच्चतम न्यायालय में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति एस ए बोबडे के उपलब्ध नहीं होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई रविवार को रद्द कर दी थी.