नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने असम के खतरनाक उग्रवादी समूहों में से एक, नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड National Democratic Front of Bodoland (एनडीएफबी) NDFB के साथ सोमवार को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए. लंबे समय से बोडो राज्य की मांग करते हुए आंदोलन चलाने वाले ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन All Bodo Students Union (एबीएसयू) ABSU ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. यह हस्ताक्षर गत 27 वर्षों में होने वाला तीसरा बोडो समझौता है

वहीं, गैर बोडो संगठनों की मांग है कि बोडोलैंड क्षेत्रीय प्रशासनिक जिलों (बीटीएडी) में रह रहे सभी गैर बोडो लोगों को शांति समझौते में शामिल किया जाना चाहिए. इस त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी के चार गुटों के नेतृत्व, एबीएसयू, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए. लंबे समय से बोडो राज्य की मांग करते हुए आंदोलन चलाने वाले ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) ने भी इस समझौते पर
हस्ताक्षर किए.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता है. उन्होंने कहा कि इससे बोडो मुद्दे का व्यापक हल मिल
सकेगा. त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में एनडीएफबी के चार धड़ों के शीर्ष नेतृत्व, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण द्वारा किए गए.

इस समझौते पर नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी चार धड़ों के नेतृत्वों, एबीएसयू प्रमुख प्रमोद बोरो,
बीटीसी प्रमुख हागरामा मोहीलरी, सोनोवाल और शर्मा ने हस्ताक्षर किए. सरकार ने असम के सबसे दुर्दांत उग्रवादी समूहों में शामिल एनडीएफबी के साथ सोमवार को समझौते पर हस्ताक्षर किए.

सरकार ने एनडीएफबी, एबीएसयू के साथ समझौता
सरकार ने सोमवार को असम के खूंखार उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उसे राजनीतिक और आर्थिक फायदे दिए गए हैं, लेकिन अलग राज्य या केंद्रशासित क्षेत्र की मांग पूरी नहीं की गई है. समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू) और यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन भी शामिल हैं. एबीएसयू 1972 से ही अलग बोडोलैंड राज्य की मांग के लिए आंदोलन चला रहा है.

एनडीएफबी के 1550 उग्रवादी 30 जनवरी को हथियार छोड़ देंगे
– अगले तीन वर्षों में 1500 करोड़ रुपए का आर्थिक कार्यक्रम लागू किया जाएगा
– आर्थिक कार्यक्रम में जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की 750- 750 करोड़ रुपए की बराबर भागीदारी होगी
– बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् (बीटीसी) के वर्तमान ढांचे को और शक्तियां देकर मजबूत किया जाएगा
– इसकी सीटों की संख्या 40 से बढ़ाकर 60 की जाएगी
– बोडो बहुल गांवों को बीटीसी में शामिल करने और जहां बोडो की बहुलता नहीं है, उन्हें बीटीसी से बाहर निकालने के लिए आयोग का गठन होगा.

ये रहे मौजूद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी, एबीएसयू के चार धड़ों के शीर्ष नेता, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येन्द्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्णा ने हस्ताक्षर किए.

अब शांति, सद्भाव और एकजुटता का नया सवेरा आएगा
पीएम नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा, बोडो समझौते के बाद अब शांति, सद्भाव और एकजुटता का नया सवेरा आएगा. समझौते से बोडो लोगों के लिए परिवर्तनकारी परिणाम सामने आएंगे, यह प्रमुख संबंधित पक्षों को एक प्रारूप के अंतर्गत साथ लेकर आया. यह समझौता बोडो लोगों की अनोखी संस्कृति की रक्षा करेगा और उसे लोकप्रिय बनाएगा और उन्हें विकासोन्मुखी पहलों तक पहुंच मिलेगी. यह समझौता बोडो लोगों की अनोखी संस्कृति की रक्षा करेगा और उसे लोकप्रिय बनाएगा तथा उन्हें विकासोन्मुखी पहलों तक पहुंच मिलेगी. बोडो लोगों को अपनी आकांक्षाओं को साकार करने में मदद पहुंचाने के वास्ते हम यथासंभव सबकुछ करने के लिए कटिबद्ध हैं: पहले जो लोग सशस्त्र प्रतिरोध से जुड़े थे, वे अब मुख्यधारा में कदम रखेंगे और राष्ट्र की प्रगति में योगदान करेंगे.

27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता
यह पिछले 27 वर्षों में तीसरा बोडो समझौता है. अलग बोडोलैंड राज्य के लिए चले हिंसक आंदोलन में सैकड़ों लोगों की जान चली गई और सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान हुआ.

यह ऐतिहासिक समझौता, पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा
गृह मंत्री ने समझौते को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि इससे बोडो लोगों की दशकों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान होगा. उन्होंने कहा, इस समझौते से बोडो क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास होगा और असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बगैर उनकी भाषा और संस्कृति का संरक्षण होगा. उन्होंने कहा, यह ऐतिहासिक समझौता है.

4000 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी
गृह मंत्री ने कहा कि बोडो उग्रवादियों की हिंसा में पिछले कुछ दशकों में चार हजार से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी. शाह ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी. असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के बाद राज्य में विभिन्न समुदाय सौहार्द के साथ रह सकेंगे. केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि समझौते से बोडो मुद्दे का व्यापक समाधान होगा.

बोडोलैंड में शांति एवं प्रगति की नई उम्मीद प्रदान करेगा
नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक शर्मा ने कहा, ”बोडो समझौता असम की क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करेगा और
हमें बोडोलैंड में शांति एवं प्रगति की नई उम्मीद प्रदान करेगा.” उन्होंने इस ऐतिहासिक समझौते को संभव बनाने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व के तहत इस पर हस्ताक्षर किए गए.

शांति समझौते के विरोध में गैर बोडो संगठनों के बंद से जनजीवन प्रभावित
गैर बोडो संगठनों की मांग है कि बोडोलैंड क्षेत्रीय प्रशासनिक जिलों (बीटीएडी) में रह रहे सभी गैर बोडो लोगों को शांति समझौते में
शामिल किया जाना चाहिए. विभिन्न बोडो पक्षकारों के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर के केंद्र के कदम के विरोध में गैर बोडो
संगठनों द्वारा सोमवार को आहूत 12 घंटे के बंद के कारण असम में बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के तहत आने वाले चार जिलों
में जनजीवन प्रभावित हुआ है.

चार जिलों में जनजीवन प्रभावित 
– कोकराझार, बक्सा, चिरांग और उदलगुड़ी जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ
– बंद का असर राज्य के अन्य हिस्सों पर नहीं पड़ा है
– कोकराझार जिले के कुछ हिस्सों में टायर जलाए गए
– सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहे. हालांकि, कॉलेजों में पूर्व निर्धारित कुछ परीक्षाएं हुईं
– सड़कों पर वाहनों की आवाजाही नजर नहीं आई
-सभी दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद हैं
– पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि रेल सेवाएं बंद से बेअसर हैं और सभी बड़ी ट्रेन समय पर चल रही हैं.