नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की नियुक्ति करने के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सुझाव को अस्वीकार कर दिया है. बोस कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश हैं. पांच महीने तक फाइल को लंबित रखने के बाद सरकार ने कॉलेजियम से अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा. Also Read - सीजेआई का फरमान, कोरोना वायरस के चलते अदालतों को पूरी तरह से नहीं किया जाएगा बंद  

इसके पीछे सरकार ने तर्क दिया है कि बोस के पास मुख्य न्यायाधीश के तौर पर कोई अनुभव नहीं है जिसके आधार पर वह इतने प्रमुख हाई कोर्ट का यह पद संभाल सकें. बोस 2004 से एक न्यायाधीश के तौर पर काम कर रहे हैं. Also Read - Corona virus: कोर्ट ने वकीलों, वादियों से अदालत परिसर में भीड़भाड़ करने से बचने को कहा

देशभर के हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए 69 नाम शॉर्टलिस्ट Also Read - भड़काऊ भाषण देने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने को लेकर याचिका, कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सराकार से मांगा जवाब

सरकार चाहती है कि कॉलेजियम 59 वर्षीय न्यायाधीश बोस की जगह दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के लिए किसी और नाम पर विचार करे. दिल्ली उच्च न्यायालय में एक साल से भी ज्यादा वक्त से कोई पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश नहीं है. सरकार ने हाल ही में वरीयता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसफ को सुप्रीम कोर्ट में बतौर न्यायाधीश पदोन्नत करने पर अपनी असहमति जताई थी.

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इससे पहले 12 जुलाई को देशभर के अलग-अलग हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति करने के लिए कानून मंत्रालय ने 69 नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास भेजे. तय प्रक्रिया के अनुसार उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम विधि मंत्रालय को भेजते हैं. इसके बाद विधि मंत्रालय अंतिम फैसले के लिए इन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के पास भेजता है.