नई दिल्ली: केन्द्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सेतुसमुद्रम नौवहन परियोजना पर काम करते वक्त पौराणिक राम सेतु तथा भारत और श्रीलंका के बीच लाइमस्टोन के समूहों की श्रृंखला को क्षतिग्रस्त नहीं किया जाएगा. पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने 2013 में शीर्ष अदालत में दाखिल दो हलफनामों में कहा था कि इस परिेयोजना के लाभ को देखते हुए वह इसे जारी रखना और इस पर अमल करना चाहती है.Also Read - Pegasus Row: जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करेगा सुप्रीम कोर्ट; अगले हफ्ते सुनाया जाएगा फैसला

हालांकि, राजग सरकार ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच को सूचित किया कि उसने इस परियोजना के ‘‘सामाजिक-आर्थिक नुकसान’’ पर विचार किया और वह राम सेतु को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बगैर ही इस नौवहन परियोजना के लिए वैकल्पिक मार्ग की संभावना तलाशना चाहती है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का हलफनामा- कोरोना से हुई मौत पर परिजनों को मिलेगा 50 हजार रुपये का मुआवजा

इस परियोजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस प्रकरण में जल्द सुनवाई का अनुरोध करते हुए इसका उल्लेख किया था. उनका कहना था कि संसद में दिए गए बयान और केन्द्र सरकार के फैसले के बाद इस परियोजना को खत्म करने का आग्रह पूरा होता है. उन्होंने कहा था कि इस संबंध में अब सरकार को हलफनामा दाखिल करना है. इसके बाद न्यायालय ने केन्द्र सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था. Also Read - Delhi-NCR से सटे हरियाणा के इन क्षेत्रों में पुराने वाहन चलाने पर लगी रोक, नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्यवाही

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की खंडपीठ के समक्ष जहाजरानी मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने वस्तु स्थिति से अवगत कराया और कहा कि स्वामी की याचिका का अब निस्तारण कर दिया जाए. जहाजरानी मंत्रालय के हलफनामे में कहा गया है, ‘‘भारत सरकार राष्ट्रहित में राम सेतु को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बगैर सेतुसमुद्रम नौवहन परियोजना के पहले के मार्ग के विकल्प की संभावना तलाशना चाहती है.’’

सेतुसमुद्रम परियोजना का कुछ राजनीतिक दल, पर्यावरणविद और चुनिन्दा हिन्दू धार्मिक समूह लगातार विरोध कर रहे थे. इस परियोजना के तहत मन्नार को पाक स्ट्रेट से जोड़ा जाना था. इसके लिये बड़े पैमाने पर इस मार्ग में समुद्र की रेत निकालने और लाइमस्टोन के समूहों को हटाने की योजना थी.

शीर्ष अदालत ने पिछले साल 13 नवंबर को केन्द्र सरकार को भारत और श्रीलंका के तट के बीच बने राम सेतु के बारे में अपना रुख स्पष्ट करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था. न्यायालय ने सरकार का जवाब नहीं मिलने की स्थिति में स्वामी को इसका उल्लेख करने की छूट प्रदान की थी.