हैदराबाद: संपत्ति के बंटवारे को लेकर हैदराबाद के आखिरी और सातवें निजाम (Nizam of Hyderabad) मीर उस्मान अली खान के परिवार में फूट गई है. नवाब उस्मान अली खान (Mir Osman Ali Khan) के पोते नवाब नजफ अली खान (Nawab Najaf Ali Khan) ने हैदराबाद पुलिस में अपने चचेरे भाई नवाब मीर बरक अली उर्फ प्रिंस मुकर्रम जाह के खिलाफ निजाम फंड मामले में ब्रिटिश हाईकोर्ट में उत्तराधिकार के ‘अवैध’ प्रमाण पत्र का उपयोग करने के लिए प्राथमिकी दर्ज कराई है. Also Read - Hyderabad Election Result 2020: हैदराबाद नगर निगम चुनाव में बजा बीजेपी का डंका, लेकिन सत्ता बरकरार रखने की ओर टीआरएस; जानिए क्या है ओवैसी की पार्टी का हाल

हैदराबाद के 7वें निजाम मीर उस्‍मान अली खान ने साल 1948 में लंदन के नेशनल वेस्टमिनिस्टर बैंक में 1,007,940 पाउंड (करीब 8 करोड़ 87 लाख रुपये) जमा कराए थे. ये धनराशि अब बढ़कर 333 करोड़ हो गई है. Also Read - GHMC Polls: बृहद हैदराबाद नगर निगम के 150 वार्डों के लिए चुनाव आज, सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू

इसी संपत्ति को लेकर नजफ अली खान ने शिकायत को सौंपने के लिए हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार से मुलाकात की. और आरोप लगाया गया कि ‘आर्थिक अपराध’ में धोखाधड़ी, जालसाजी, गलत बयानी शामिल है, उन्होंने निजाम की संपत्ति के साथ हेराफेरी करने के लिए झूठे और मनगढ़ंत सबूत इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया है. नजफ अली खान ने प्रिंस मुकर्रम जाह की पूर्व पत्नी एरा बेरजिन जाह और उनके भाई प्रिंस मुफ्फाखम जाह के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई है. मामला 3.5 करोड़ ब्रिटिश पाउंड यानी 333 करोड़ रुपये की संपत्ति का है, जिसके बंटवारे पर निजाम परिवार में फूट हो गई है. Also Read - GHMC Election 2020: हैदराबाद में बोले अमित शाह- जीएचएमसी चुनाव में जीत होने के बाद हैदराबाद बनेगा आईटी केंद्र, खत्म होगी निजाम संस्कृति

शिकायत में कहा गया, “हमने भारत के नवाब मीर बरकत अली खान उर्फ प्रिंस मुकर्रम जाह को 27-02-1967 को भारत सरकार द्वारा जारी निजाम फंड मामले में ब्रिटेन के हाईकोर्ट में उत्तराधिकार के अवैध प्रमाण पत्र के उपयोग के विवरण सहित एक शिकायत पुलिस आयुक्त को सौंपी, जिन्होंने खुद को निजाम (सप्तम) का एकमात्र उत्तराधिकारी दिखाया है. उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर धोखे से प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया, ताकि हैदराबाद के सातवें निजाम के बाकी कानूनी उत्तराधिकारियों को नुकसान पहुंचाया जा सके.”

उन्होंने बताया कि हमने उन्हें सूचित किया कि 26वें संशोधन अधिनियम, 1971 के तहत भारत के संविधान में अनुच्छेद 363ए के सम्मिलन से वह प्रमाण पत्र कानूनन अमान्य हो गया है. प्रिंस मुकर्रम जाह हैदराबाद के शासक नहीं हैं. वह अपने दादा एच.ईएच. नवाब सर मीर उस्मान अली खान बहादुर के उत्तराधिकारी नहीं रहे और और वह भारत के किसी भी सामान्य नागरिक की तरह हैं. इसलिए, विरासत के मामले के लिए विरासत का व्यक्तिगत कानून लागू होता है.

नवाब नजफ अली खान, जो निजाम फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष और निजाम सप्तम के एस्टेट के 100 से अधिक वारिसों में से एक हैं, ने उनके और परिवार के सदस्यों के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए कहा उन्हें धमकाया जा रहा है.

इस प्रमाणपत्र के आधार पर ब्रिटेन की अदालत ने पिछले साल आदेश दिया था कि 3.5 करोड़ ब्रिटिश पाउंड (333 करोड़ रुपये ) नकद भारत सरकार और मुकर्रम जाह और उनके भाई मुफ्फाखम जाह के बीच बांटे जाने चाहिए. उन्होंने बताया कि पुलिस आयुक्त ने याचिका पर गौर करने और इसे आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी टीम को सौंपने का आश्वासन दिया है.