पानी बरसा नहीं, न नदी में पानी है न नाले में. पानी की बहुत किल्लत है. पीने का पानी नहीं मिलता. सबमर्सिबल लगाने में एक लाख से ज्यादा का खर्च आता है. मध्य बिहार में पानी खत्म हो गया है. ये कहना है कि किसान लक्ष्मण प्रसाद का. दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए वह पटना से आए हैं. दिल्ली में 20 हजार लीटर पानी हर महीने फ्री मिलता है. उसी दिल्ली में पानी की कमी से जूझ रहे किसान अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. लक्ष्मण प्रसाद को ये भी नहीं पता कि जिस ट्रेन से वह आए हैं उसका नाम क्या है. वे खुद के खर्चे से दिल्ली पहुंचे हैं. ये पूछने पर कि किसानों के इस प्रदर्शन के बारे में कैसे पता चला. बोले अखबार से. लक्ष्मण प्रसाद के पास 1.5 बीघा खेत है. उनके दो बच्चे हैं जो सूरत में काम करते हैं. प्रसाद के साथ 100 किसान आए हैं. सभी किसानों की एक ही कहानी है. उन्होंने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लिया था. बैंक वाले नोटिस भेजते हैं.

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महाराष्ट्र के सोलापुर से आए किसान हरि नारायण राणे भी पानी की कमी से परेशान हैं. उनका कहना है कि पीने का पानी नहीं है. जानवरों तक के लिए पानी नहीं मिल रहा है. महाराष्ट के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कृत्रिम तरीके से पानी बरसाने की बात कही थी लेकिन कुछ नहीं हो रहा. हरि नारायण ने बताया कि 5-6 नवम्बर को अखिल भारतीय किसान सभा का एक कार्यक्रम हुआ था उसी में दिल्ली का प्रोग्राम बना. वह 27 की शाम को सोलापुर से निकले थे. केके ट्रेन (कन्या कुमारी से कश्मीर ट्रेन) जनरल बोगी में बैठ और दिल्ली पहुंच गए. 28 नवंबर की रात 1: 30 बजे स्टेशन उतरे और पैदल ही रामलीला मैदान पहुंच गए.

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पश्चिम बंगाल के उत्तर दिशा पुर से जनरल बोगी में बैठकर आए किसान से यह पूछने पर कि परेशानी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा दिक्कत गांव और घर में है. खाद पानी, डीजल का दाम नहीं मिल रहा. गांव में पल-पल तो मर रहे थे जो थोड़ा बहुत बचा है उसे ही बचाने आए हैं. पानी की दिक्कत है. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी स्कूल में मिड डे मील बनाती हैं. रोज 50 रुपए मिलते हैं लेकिन इससे गुजारा नहीं चल रहा.

पिज्जा और बर्गर वाली दिल्ली में किसान अपने साथ खाने के लिए चिवड़ा मूड़ी लाए हैं. जब तक वे दिल्ली में रहेंगे यही खाकर अपना पेट भरेंगे. उपेंद्र नाथ रॉय ने बताया कि योगेंद्र यादव के साथ दिनेश सिंह ने 17 नबंर को खतड़िया गांव के स्कूल में मीटिंग की थी. इसी कार्यक्रम में दिल्ली चलने की बात बनी. निर्मल सिंह पंजाब के मोगा जिले से आए हैं. उन्होंने बताया कि हमारी गोभी दो रुपए किलो बिक रही है. आलू 10 रुपए किलो बिक रहा है. उन्होंने बताया कि मोंगा में 4 महीने पहले मीटिंग हुई थी. उसी समय इस प्रदर्शन में शामिल होने का कार्यक्रम बना था.

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले किसान साधु ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम की भनक लग जाती है. खुद का खेत नहीं है वह दूसरे के खेतों में काम करते है. वह लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हर कार्यक्रम में प्रदर्शन करने जाते हैं. यह पूछने पर कि वह किस ट्रेन से आए हैं कंफ्यूज हो जाते हैं. साथ वाले से पूछकर बताया कि जमानिया से तूफान एक्सप्रेस से चले. गुरुवार सुबह 8 बजे ट्रेन में बिना टिकट बैठे थे. वह रास्ते के लिए खाना साथ लाए हैं.

न्यू डिजिटल इंडिया में किसान पीने के पानी तक के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके पास स्मार्टफोन नहीं है. वे फ्री इंटरनेट भी नहीं चलाते, लेकिन अपने हक की लड़ाई के लिए देश के कोने कोने से पोटली में खाना बांधे, जनरल बोगी में घंटो का सफर तय कर दिल्ली आए हैं. इस उम्मीद में कि दिल्ली में जब वे एक साथ जोर से बोलेंगे तो संसद उनकी आवाज सुनेगी औऱ उनके दिन बहुरेंगे.