नई दिल्ली :  भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी यानी इसरो (ISRO) द्वारा तैयार गए सबसे अधिक वजनी उपग्रह GSAT-11 को बुधवार को लॉन्च किया जाएगा. इस उपग्रह को फ्रेंच गुआना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. इस उपग्रह का वजन करीब 5,854 किलोग्राम है. GSAT-11 देश में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा और इसकी मदद से इंटरनेट स्पीड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इसरो के मुताबिक GSAT-11 नेक्स्ट जेनेरेशन का ‘हाई थ्रुपुट’ संचार उपग्रह है और इसका जीवनकाल 15 साल से अधिक का है. Also Read - Sarkari Naukri: ISRO SAC Recruitment 2020: इसरो में नौकरी करने का सुनहरा मौका, जल्द करें आवेदन, ये है आखिरी तारीख 

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इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था, लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच का हवाला देते हुए इसकी लॉन्चिंग का कार्यक्रम बदल दिया था. एरियाने-5 रॉकेट GSAT-11 के साथ कोरिया एयरोस्पेस अनुसंधान संस्थान (केएआरआई) के लिए जियो-कोम्पसैट-2ए उपग्रह भी लेकर जाएगा. यह उपग्रह मौसम विज्ञान से संबंधित है. Also Read - Mars Orbiter Mission: अंतरिक्ष विज्ञान में भारत को मिली थी बड़ी सफलता, मंगलयान की हुई थी रवानगी

इसरो की बड़ी सफलता, PSLV-C43 लॉन्‍च, भारत के HysIS व 8 देशों के 30 उपग्रह के साथ कक्षा में स्‍थापित

इसरो इस उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद अपनी उपलब्धियों में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ लेगी. इससे पहले 29 नवंबर को धरती पर पैनी निगाह रखने वाले उपग्रह हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (हायसिस) और आठ देशों के 30 छोटे उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया था. इस प्रक्रिया में भारत ने 250 विदेशी उपग्रहों को लांच और कक्षा में स्थापित कर मील का पत्थर पार कर लिया.

हाइसिस ने 29 नवंबर को प्रक्षेपित होने के बाद अपनी पहली तस्वीर भी भेजी है, जिसमें गुजरात के लखपत इलाके के हिस्सों को दिखाया गया है. इसरो ने बताया कि राष्ट्रीय दूर संवेदी केन्द्र (एनआरएससी) पर हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (हाइसिस) से हासिल की गई तस्वीरों को कृषि, मृदा सर्वेक्षण और पर्यावरणीय निगरानी में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसरो के सूत्रों ने बताया कि हाइसिस से जिस कोटि की तस्वीर मिली है उससे एजेंसी संतुष्ट है. (इनपुट एजेंसियों से)