श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश): इसरो ने अपने सबसे भारी और ‘‘शक्तिशाली’’ बताए जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3- डी2 के जरिए देश के नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट-29 को बुधवार को सफलतापूर्वक कक्षा में पहुंचा दिया. इस प्रक्षेपण को महत्वाकांक्षी ‘‘चंद्रयान-2’’ अभियान और देश के ‘‘मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन’’ के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है क्योंकि उनमें इसी का उपयोग किया जाएगा. जीसैट-29 उपग्रह का वजन 3,423 किग्रा है. यह अंतरिक्ष में भेजा जाने वाला भारत का सबसे भारी उपग्रह है. इसके जरिए देश के दूर दराज के इलाकों में लोगों की संचार जरूरतों के पूरा होने की उम्मीद है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के. सिवन ने कहा कि चंद्रयान के साथ रॉकेट का प्रथम ऑपरेशनल मिशन जनवरी 2019 में होने जा रहा है. वहीं, यह शानदार यान अब से तीन साल में मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाला है. सिवन के मुताबिक इसरो ने अंतरिक्ष में देश के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त मिशन को 2021 तक हासिल करने का लक्ष्य रक्षा है, जबकि पहला मानव रहित कार्यक्रम ‘गगनयान’ की योजना दिसंबर 2020 के लिए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह पर अपने संबोधन में यह घोषणा की थी कि भारत गगनयान के जरिए 2022 तक एक अंतरिक्ष यात्री को भेजने की (अंतरिक्ष में) कोशिश करेगा. इस अभियान के सफल होने पर भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला चौथा राष्ट्र बन जाएगा.

प्रक्षेपण के लिए 27 घंटों की उलटी गिनती मंगलवार दोपहर दो बज कर 50 मिनट पर शुरू हुई थी. रॉकेट चेन्नई से 100 किमी से भी अधिक दूर स्थित श्री हरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से शाम पांच बजकर आठ मिनट पर रवाना हुआ. इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा कि जीसैट-29 उपग्रह में ‘‘केए’’ एवं ‘‘केयू’’ बैंड के ट्रांसपोंडर लगे हुए हैं, जिनका मकसद केंद्र के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में मदद करने के अलावा पूर्वोत्तर और जम्मू कश्मीर के दूर दराज के क्षेत्रों में संचार सेवाएं मुहैया करना है.

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प्रक्षेपण के 16 मिनट बाद उपग्रह के भूस्थैतिक कक्षा में प्रवेश करते ही इसरो के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई. सिवन ने कहा कि देश ने इस सफल प्रक्षेपण और उपग्रह के जीटीओ (भूस्थैतिक स्थानांतरण कक्षा) में प्रवेश करने के साथ एक अहम मुकाम हासिल कर लिया है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह घोषणा करते हुए काफी खुश हूं कि हमारा सबसे भारी लॉन्‍चर (रॉकेट) अपने दूसरे अभियान में भारतीय सरजमीं से सबसे भारी उपग्रह जीसैट 29 को लेकर रवाना हुआ और 16 मिनट की शानदार यात्रा के बाद यह लक्षित जीटीओ में पहुंच गया.’’ चक्रवात गज से उपग्रह प्रक्षेपण की योजना को कुछ समस्या पेश आई थी, लेकिन अनुकूल मौसम रहने से रॉकेट को तय कार्यक्रम के मुताबिक प्रक्षेपित किया गया.

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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीसएलवी रॉकेट से नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट-29 के सफल प्रक्षेपण को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों को बधाई दी है. उपराष्ट्रपति सचिवालय ने ट्वीट किया, ‘‘जीसैट-29 संचार उपग्रह के आज किए गए सफल प्रक्षेपण के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई. इससे जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के दूर दराज के इलाकों में लोगों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मुहैया करने में मदद मिलेगी.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपग्रह देश के सुदूर क्षेत्रों को संचार और इंटरनेट सेवाएं मुहैया करेगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘जीएसएलवी मार्क 3-डी2 के जरिए जीसैट-29 के सफल प्रक्षेपण पर हमारे वैज्ञानिकों को मेरी हार्दिक बधाई. इस दोहरी सफलता ने किसी भारतीय रॉकेट द्वारा सबसे भारी उपग्रह को कक्षा में पहुंचाने का नया रिकॉर्ड बनाया है.’’

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इसरो ने कहा कि उपग्रह को इसके लक्षित भूस्थैतिक कक्षा में उसमें लगी प्रणोदक प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए पहुंचाया जाएगा. रॉकेट से उपग्रह के अलग होने के बाद निर्धारित कक्षा में पहुंचने में कुछ दिनों का वक्त लग सकता है. गौरतलब है कि पांचवीं पीढ़ी के प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क 3-डी2 तीन चरणों वाला एक रॉकेट है. इसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा हुआ है. इस यान का विकास इसरो ने किया है. इसे 4000 किग्रा तक के उपग्रहों को जीटीओ में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. ठोस और तरल चरणों की तुलना में सी 25 क्रायोजेनिक चरण कहीं अधिक सक्षम है. इसरो का यह उपग्रह करीब 10 साल सेवा देगा. उपग्रह के प्रक्षेपण के आठ मिनट बाद भूस्थैतिक कक्षा में प्रवेश करने का कार्यक्रम है. इसरो द्वारा निर्मित यह 33 वां संचार उपग्रह है. सिवन ने जीएसएलवी मार्क-3 डी2 को शानदार और भरोसेमंद बताया. यह पूछे जाने पर कि मानवयुक्त मिशन का प्रक्षेपण कहां होगा, उन्होंने कहा कि यह श्री हरिकोटा से होगा. उस प्रक्षेपण के लिए हमें लॉन्‍च पैड में बदलाव करना होगा.