श्रीहरिकोटा. भारत ने आधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-19 को ले जाने वाले सबसे अधिक वजनी और शक्तिशाली भूस्थिर रॉकेट जीएसएलवी एमके 3-डी1 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण कर इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया. चेन्नई से करीब 125 किलोमीटर दूर यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर दूसरे लॉन्च पैड से शाम पांच बजकर 28 मिनट पर 43.43 मीटर लंबे रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया और इसने देश के अब तक के सबसे अधिक 3,136 किलोग्राम वजन वाले जीसैट-19 उपग्रह को करीब 16 मिनट बाद अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया. इस रॉकेट से भविष्य में अंतरिक्ष में मनुष्यों को ले जाने की भी संभावना है. इसरो की इस कामयाबी पर सिर्फ देशवासियों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ही उन्हें बधाई नहीं दी बल्कि दुनियाभर में इसरो के नाम की चर्चा हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने लॉन्चिंग की तारीफ करते हुए लिखा है कि इसरो ने कम खर्च वाले मिशन के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा ली है. वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, ‘2014 में, भारत ने मंगल ग्रह पर अभियान शुरू किया था. उस वक्त मिशन की लागत 74 मिलियन डॉलर (450 करोड़ भारतीय रुपए) थी. पीएम नरेंद्र मोदी ने इंगित किया था कि ये खर्च ‘ग्रेविटी’ फिल्म पर हुए खर्चे से भी कम था.

एक दूसरे मीडिया हाउस ने लिखा, ‘सरकार के सहयोग से कम खर्च में इसरो प्रतिद्वंदी देशों की अपेक्षा बेहद कम कीमत में सैटलाइट लॉन्च कर सकता है.’ इस मीडिया हाउस ने भी 2014 के मंगल मिशन का उल्लेख किया है. इसरो की कमर्शल शाखा, एंट्रिक्स किसी सैटलाइट को लॉन्च करने के लिए हाल के वर्षों से 3 मिलियन डॉलर चार्ज कर रही है. ये धनराशि प्राइवेट कंपनियों से बेहद कम हैं.

वॉशिंगटन पोस्ट ने आगे लिखा है, ‘नया रॉकेट भारी सैटलाइट को भी ले जाने में सक्षम होगा जिसके लिए भारत फ्रांस की स्पेस एजेंसी पर निर्भर रहता था.’ अखबार ने फरवरी में हुई उस लॉन्चिंग का भी जिक्र किया है जब इसरो ने एक बार में 104 सैटलाइट लॉन्च किए थे.

इस कामयाबी पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जीएसएलवी एमके 3-डी1 और जीसैट-19 के सफल प्रक्षेपण की प्रशंसा की. मुखर्जी ने कहा कि देश इसरो की उपलब्धि से गौरवान्वित है. मोदी ने कहा कि यह मिशन भारत को अगली पीढ़ी की उपग्रह क्षमता के नजदीक ले जाता है. वहीं, प्रफुल्लित इसरो चेयरमैन ए एस किरन कुमार ने कहा, ‘यह ऐतिहासिक दिन है.’ उन्होंने कहा कि उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क थ्री (एमके तृतीय डी-1) ने जीसैट-19 को लक्षित कक्षा में स्थापित कर अपनी क्षमताओं का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया.

कुमार ने कहा, ‘पहले प्रयास में यह बड़ी सफलता है और जीएसएलवी एमके 3 ने अगली पीढ़ी के उपग्रह जीसैट-19 को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया.’ उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी टीम को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने 2002 से लेकर आज के इस प्रक्षेपण के लिए हर दिन लगातार काम किया.’