राज्यसभा में आज जीएसटी बिल को पेश किया जाएगा। जिस बिल को सरल और सीधी भाषा में जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) बिल कहा जा रहा है वह असल में जीसएसटी बिल नहीं है बल्कि एक संविधान संशोधन बिल है, जो असल में जीएसटी बिल का रास्ता साफ करेगा। बताना चाहेंगे कि राज्यसभा में जीएसटी बिल पास होते ही देश में एक टैक्स नियम लागू हो जाएगा। यानी अभी तो जो भी इनटायरेक्ट टैक्स वसूला जा रहा था, या राज्य अपने-अपने तरीके से टैक्स वैट लगाते थे वो सब खत्म हो जाएगा। 30 से 35 फीसदी तक दिया जा रहा टैक्स घटकर 17 से 18 फीसदी पर आ जाएगा, क्योंकि एक्साइज टैक्स, सर्विस टैक्स, वैट, सेल्स टैक्स, एटरटेनमेंट टैक्स और लक्जरी टैक्स खत्म हो जाएगा। Also Read - JP Nadda Birthday: ABVP के छात्र नेता से लेकर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक, जेपी नड्डा ने ऐसे छुईं ऊँचाईयां

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चूंकि यह संविधान संशोधन कानून है इसलिये संसद से पास होने के बाद इस कानून को कम से कम 15 राज्यों की विधानसभाओं से पास होना ज़रूरी है। इसके बाद ही केंद्र असल जीएसटी कानून लागू करा पाएगा। कांग्रेस की प्रमुख मांगों में से एक है कि जीएसटी की दर को 18% पर सीमित किया जाए। औद्योगिक रूप से विकसित तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों को जीएसटी बिल के पास होने के बाद घाटा उठाना पड़ेगा जिसकी भरपाई के लिये फिलहाल केंद्र ने भरोसा दिया है। यह भी पढ़े-जीएसटी लागू होने के बाद यह चीज़ होगी सस्ती Also Read - पीएम मोदी ने बाबा विश्वनाथ की पूजा की, प्रसाद में मिला भस्मी और दुपट्टा, देखें वीडियो

दरअसल मंगलवार को संसद भवन के बाहर कांग्रेस के सांसद अभिषेक मनु सिघवी ने कहा, ‘अगर कोई बाधा नहीं आई तो जीएसटी विधेयक को बुधवार को मंजूरी दे दी जाएगी। सरकार ने मंगलवार को ही सदन के सदस्यों के बीच मसौदा विधेयक की संशोधन कॉपियां वितरित कर दी थी। वहीं बीजेपी और कांग्रेस ने पहले ही अपने सदस्यों को बुधवार को राज्यसभा में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं, जहां जीएसटी विधेयक पर बहस और मतदान होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि जीएसटी की नींव 16 बरस पहले वाजपेयी सरकार ने डाली थी। 360 डिग्री में घुमते हुए बुधवार को राज्यसभा में पास होने की उम्मीद है, क्योंकि 16 साल पहले वाजपेयी सरकार अल्पमत में थी तो पेश नहीं कर सकी और साल 2009 में मनमोहन सरकार ने कोशिश की, तो गैर-कांग्रेसी शासित राज्यों ने विरोध कर दिया। अब केंद्र और ज्यादातर राज्यों में बीजेपी की बहुमत वाली सरकारें हैं, तो राज्यसभा में कांग्रेस को साथ लेने के लिए मोदी सरकार अपने रुख थोड़े नरम किए. जिसके बाद कांग्रेस से सहमति बन गई। यह भी पढ़े-मानसून सत्र कल से, जीएसटी पर सरकार की छटपटाहट तेज़

एक देश एक टैक्स की सोच देश में लागू होते ही इसका फायदा हर व्यक्ति को मिलेगा. इसके लागू होते ही 20 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स खत्म होंगे और सिर्फ तीन तरह के (सेंट्रल, स्टेट और इंटिग्रेटेड जीएसटी) टैक्स ही लगेंगे। सेंट्रल जीएसटी टैक्स केंद्र सरकार वसूलेगी. स्टेट जीएसटी टैक्स राज्य सरकार वसूलेगी, और इंटिग्रेटेड जीएसटी को केन्द्र राज्य दोनों वसूलेंगे, क्योंकि ये दो राज्यों के बीच कारोबार होने पर लगेगा।

जाहिर है ये सवाल हर जहन में होगा कि जीएसटी लागू होने से क्या सस्ता और क्या महंगा होगा? रेस्तरां में खाना खाना, कज्यूमर ड्यूरेबल्स मसलन एयर कंडीशन, माइक्रोवेव, मशीनरी सामान और माल ढुलाई सस्ती होगी तो जबकि डिब्बा बंद फूड प्रोडक्ट्स, चाय, कॉफी, मोबाइल बिल, क्रेडिड कार्ड का बिल, ज्वेलरी और कपड़ा महंगा हो जाएगा।

जीएसटी क्या है?

वस्तु और सेवाओं से जुड़ा टैक्स

पूरे देश भर में एक ही दर लागू

अलग-अलग करों से छुटकारा

राज्यों को मिलेगा टैक्स में हिस्सा

शुरुआती सालों में राज्यों को छूट

करों के वसूली में आसानी

जीडीपी बढ़ने की संभावना

कारोबार में होगी सुविधा

आर्थिक सुधारों के लिए ज़रूरी

आज़ादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार

यूपीए सरकार का बड़ा एजेंडा

जीएसटी लागू होने के बाद दो से तीन बरस तक महंगाई बढ़ भी सकती है। वैसे सरकार का दावा है कि जीएसटी लागू होने के बाद ग्रोथ रेट में 2% का इजाफा होगा। हालांकि सच यह भी है कि पूरी दुनिया में जीएसटी लागू करने के बाद हुए चुनावों में कोई भी सरकार दोबारा नहीं चुनी गई है, क्योंकि शुरुआती सालों में कुछ चीजें महंगी हो जाती हैं, इसका खमियाजा सरकार को भुगतना पड़ता है।