वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को एक बार फिर वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था (जीएसटी) को जल्द लागू करने की बात दोहराई और कहा कि प्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है।वित्त मंत्री ने यहां दो दिवसीय निवेश सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, “जीएसटी का ज्यादातर राजनीतिक दल समर्थन कर रहे हैं और मैं समझता हूं कि बाकी दलों के लिए इसके समर्थन नहीं करने का कोई कारण नहीं है। इसलिए जल्द ही जीएसटी हकीकत में बदलेगी।”जीएसटी विधेयक के वर्तमान स्वरूप का मुख्य रूप से प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस विरोध कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि सरकार इस विधेयक में एक फीसदी अतिरिक्त कर को खत्म करे जो राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रस्तावित है। साथ ही जीएसटी की दरों को विधेयक के अंदर ही शामिल करे तथा छूट वाले चीजों की सीमा तय करे।यहाँ भी पढ़े:सर्वोच्च न्यायालय का निगम कर्मियों की हड़ताल में हस्तक्षेप से इंकार Also Read - 'भारत को किसी से डर नहीं लगता, देश का उदय भी किसी के लिए खतरा नहीं'

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जेटली ने कहा कि अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के साथ ही प्रत्यक्ष कर प्रणाली में सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम अपने प्रत्यक्ष कर प्रणाली को तर्कसंगत बनाना चाहते हैं ताकि हम दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था से प्रतिस्पर्धा कर सकें। वित्त मंत्री 29 फरवरी को आम बजट प्रस्तुत करने वाले हैं।जेटली ने कहा कि दुनिया भर की वित्तीय प्रणालियों में चिंता बरकरार है, लेकिन भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और आगे भी बनी रहेगी। हम में इससे भी ज्यादा तेजी से वृद्धि करने की क्षमता है और हमें इसका एहसास करने की जरूरत है। Also Read - UNGC हिंदूओं, सिखों, बौद्धों के खिलाफ हिंसा पर आवाज उठाने में नाकाम: भारत

उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक निवेशकों का भी फायदा है, क्योंकि देश में अवसंरचना, सड़क, राजमार्ग, फ्लाईओवर, रेल, बिजली, अक्षय ऊर्जा, तेल, गैस, बंदरगाह और हवाईअड्डा जैसे कई क्षेत्रों में निवेश की भारी जरूरत है।उन्होंने कहा कि इसमें भारत और भारत में निवेश करने वाले दोनों ही पक्षों के लिए फायदे का सौदा है। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार विवादों के समाधान के लिए तेजी से काम कर रही है और कोई भी परियोजना लंबित नहीं रहेगी।