नई दिल्ली: सपा और बसपा के बीच यूपी में गठबंधन के एलान कर दिया गया है. लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां 38-38 सीट पर चुनाव लड़ेंगीं. दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी गई हैं. राजनीति में कभी धुर विरोधी रहीं ये दोनों पार्टियां अब साथ आ गई हैं. यूपी की राजधानी लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड ने इन दोनों पार्टियों के लोगों को एक दूसरे का दुश्मन बना दिया था. भले ही इस कांड को 23 साल हो गए हों, हाथी और साइकिल ने साथ चलने का फैसला कर लिया हो, लेकिन मायावती गठबंधन के एलान के बीच भी गेस्ट हाउस का ज़िक्र करना नहीं भूलीं. इस बार के ज़िक्र में सपा को कोई धमकी या चेतावनी नहीं थी, बल्कि मायावती ने कहा कि 1993 में भी दोनों पार्टियां साथ आई थीं. यूपी में सरकार भी दोनों ने बनाई थी, लेकिन कुछ गंभीर कारणों से ज़्यादा समय गठबंधन तक साथ नहीं चल सका था. मायावती ने कहा- गेस्ट हाउस कांड हुआ था, जनहित में उससे ऊपर ये फैसला लिया गया है. हमने गेस्ट हाउस कांड को किनारे कर दिया है. मायावती ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में दो बार गेस्ट हाउस कांड को याद किया. वहीं, अखिलेश यादव ने कहा कि अब मायावती का अपमान, मेरा अपमान होगा.

इस तरह हुई थी घटना

मायावती अगर आज भी उस कांड को सपा से दोस्ती के बाद भी नहीं भूली हैं तो इसकी वजह भी है. 2 जून, 1995 के इस कांड को न सिर्फ मायावती बल्कि इसके गवाह रहे नेता भी अक्सर याद करते हैं. बसपा से तीन बार विधायक व कैबिनेट मंत्री रहे धूराम चौधरी भी इस घटना के गवाह रहे हैं. धूराम चौधरी गेस्ट हाउस कांड को सबसे दुर्दांत और राजनीति के लिए काला दिन मानते हैं. वह कहते हैं- उस घटना के बाद सपा-बसपा और दो वर्गों के बीच खाई चौड़ी हो गई थी. धूराम चौधरी बताते हैं कि 1993 में बसपा के समर्थन से सपा ने सरकार बनाई थी. बसपा ने समर्थन वापस लिया तो सपा सरकार गिर गई. सपा सरकार गिरने के बाद मायावती मीराबाई गेस्ट हाउस के कॉमन हॉल में विधायकों के साथ मीटिंग कर रही थीं. इसी बीच कुछ प्रेस के लोग आ गए. मायावती ने हमसे कहा कि पहले प्रेस से बात कर लें फिर बात करते हैं. वो अपने सुइट नंबर एक में चली गईं.

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मायावती जहां थीं, वहीं हुआ था हमला

धूराम कहते हैं कि इसके बाद जो घटित हुआ वह इतिहास में काले दिन के रूप में है. 2 जून, 1995 को दोपहर के करीब ढाई बजे थे. इसी बीच समाजवादी पार्टी से जुड़े चार-पांच सौ लोग आ धमके. वहां 40-45 बसपा विधायक थे. इन सब हमला बोल दिया. अचानक हमला बोला गया. कोई कुछ समझ नहीं पाया. भीड़ गालियां दे रही थी. मारपीट की जाने लगी. भीड़ ने कई विधायकों को गाड़ी में डाल लिया. घसीटते हुए गाड़ी में डाला गया. 22 लोग काफी देर तक सपाइयों के कब्ज़े में बने रहे. ‘मारो-मारो, पकड़ो-पकड़ो’ की आवाजें आ रही थीं. बसपा के विधायकों को जूतों से पीटा गया.

इस तरह पानी पर टूट पड़े थे
धूराम बताते हैं कि घटना की रात में हम सुइट नम्बर 1 में ही बंद बने रहे. दो कमरों में हम लोग बैठे रहे. सभी बुरी तरह से डर गये थे. पूरी रात सोये नहीं. फिर भी मुश्किल ख़त्म नहीं हुई. जहां ठहरे थे. वहां का पानी बंद कर दिया गया. बिजली कनेक्शन भी हटा दिया गया. टेलीफोन भी कट गया. हम सब कई घंटों से प्यासे थे. रात के एक बजे सेंट्रल रिज़र्व फोर्स लगा. तब हमें पीने के लिए एक बाल्टी पानी मिला. पानी पर बुरी तरह से टूट पड़े थे. इसके बाद हमें अलग-अलग कमरों में शिफ्ट किया गया. इस तरह वह दिन गुजरा था. मायावती ने इससे नाराज होते हुए अगले ही दिन बीजेपी से गठबंधन कर लिया था. और फिर से सीएम बनीं.

मायावती ने खुद को इस तरह बचाया था
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद बताते हैं कि मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था. वह जिस कमरे में थीं, सपा के लोग उसे भी खुलवाने की कोशिश कर रहे थे. उनके अनुसार दरवाजा टूटने और खुलने से बचाने के लिए मेज और सोफे को दरवाजे से सटाकर लगा लिया गया था. इस तरह मायावती बचीं थीं. मायावती ने इससे पहले भी कई बार गेस्ट हाउस कांड को उन्हें जान से मारने की साजिश बता चुकी हैं. आज भी वह इस कांड का जिक्र करना नहीं भूलीं.