नई दिल्ली: देश में हुई मॉब लिंचिंग की कई घटनाओं को मद्देनजर देश के शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को गाइड लाइन्स के व्यापक प्रचार- प्रसार के निर्देश दिए हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र और राज्यों से रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया मंचों पर मॉब लिंचिंग से संबंधित उसके दिशानिर्देशों का व्यापक प्रचार करने को कहा. अदालत ने अपने दिशानिर्देश में बताया था कि किसी भी प्रकार की भीड़ की हिंसा में संलिप्त होने पर कानून के अंतर्गत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई को अपने आदेश में केंद्र और राज्य सरकारों को रेडियो, टीवी, गृह विभाग व राज्य पुलिस की वेबसाइटों पर यह प्रसारित करने का आदेश दिया था कि भीड़ की हिंसा व लिंचिंग में शामिल होने पर कानून के अंतर्गत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.’

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अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने अदालत को सूचित किया कि मंत्रियों का एक समूह (जीओएम) गौरक्षक समूहों द्वारा पीट-पीट कर मार डालने की घटना से निपटने के लिए कानून की प्रकृति पर विचार कर रहा है, जिसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र व राज्य सरकारों से उसके 17 अगस्त के आदेश को पालन करने को कहा.

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अदालत ने यह आदेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह द्वारा अदालत को यह बताने के बाद दिया कि केवल नौ राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट पेश किया है. इसके अलावा, अदालत ने रकबर खान की हत्या के संबंध में भी राजस्थान सरकार से रिपोर्ट की मांग की. रकबर खान की गौरक्षकों ने 24 जुलाई को राजस्थान के रामगढ़ जिले के लालवंडी गांव में पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई थी.

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राजस्थान ने गुरुवार को अदालत को सूचित किया था कि मामले से संबंधित एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा राज्य ने बताया कि तीन कांस्टेबल को पुलिस लाइन स्थांतरित कर दिया गया है.