अहमदाबाद: इन दिनों गुजरात में दलित सामाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर केस की खूब चर्चा है. सोमवार को गुजरात विधानसभा में जिग्‍नेश मेवाणी भी इसी मुद्दे पर कुछ बोलना चाहते थे, लेकिन उनके दिल की पूरी बात जुबान पर नहीं आ सकी. इससे पहले ही उनका माइक बंद हो गया. दरअसल, जिग्‍नेश ने अभी 40 सेकेंड बोला ही था कि विधानसभा अध्‍यक्ष ने उनका माइक बंद करने का आदेश दे दिया. Also Read - कॉमन सर्विस सेंटर में काम करने वाली देश की पहली ट्रांसजेंडर ऑपरेटर बनी जोया खान, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद किया ट्वीट

सुर्खियों में हुए भानुभाई वणकर केस को विधानसभा में उठाने से चूके जिग्‍नेश ने कहा कि यह सरकार दलितों के विरोध में काम कर रही है और वह वणकर मामले में किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं करना चाहती. वहीं दूसरी ओर थानगढ़ में तीन दलितों की मौत के बाद जिग्‍नेश ने एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की. जिग्‍नेश ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं लेकिन सरकार नहीं मान रही. Also Read - लेह अस्पताल में जहां जवानों से मिले पीएम मोदी उसको लेकर उठे सवाल, सेना ने की सबकी बोलती बंद

जिग्‍नेश ने कहा कि सरकार दलितों की परेशानियों को नहीं देखना चाहती. तभी तो पीड़ित परिवार को 8 लाख रुपये देने की घोषणा तो सरकार ने कर दिया, लेकिन परिवार को अब तक सहायता राशि नहीं पहुंचाई. Also Read - 'सेवा ही संगठन' कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी- तारीफ के हकदार हैं बिहार के भाजपा कार्यकर्ता

क्‍या है पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा मामला जमीन विवाद से जुड़ा है. पिछले कुछ समय से एक दलित परिवार कलेक्टर ऑफिस का चक्कर लगा रहा था. जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो परिवार के सदस्य धरने पर बैठ गए. लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद गुरुवार की दोपहर दलित समाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर ने खुद पर केरोसीन डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. हालांकि पुलिस ने आग काबू करने का प्रयास किया लेकिन इसमें भानुभाई का 50 फीसदी शरीर जल गया. बाद में गांधीनगर के अस्पताल में उनका निधन हो गया था. इसके बाद दलित नेता जिग्नेश मेवानी ने अहमदाबाद बंद का ऐलान किया था. हालांकि, उन्हें पुलिस ने इससे पहले ही हिरासत में ले लिया था.