अहमदाबाद: गुजरात पुलिस कॉन्‍स्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा पर्चा लीक होने के बाद रविवार को रद्द कर दी गई. परीक्षा शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले यह फैसला लिया गया. अधिकारियों ने बताया कि करीब आठ लाख 75 हजार उम्मीदवारों को अपराह्न तीन बजे शुरू होने वाली परीक्षा में बैठना था जो गुजरात के दो हजार 440 केंद्रों पर आयोजित होनी थी. एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को तत्काल कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं. इस बीच, उम्मीदवारों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस घटना के विरोध में सड़कों को जाम किया और टायर जलाए.Also Read - यूपी की रंगबाजी दिखाने वाली इंस्टाग्राम स्टार कांस्टेबल ने दिया इस्तीफा, बोलीं- लोग मुझसे इतने नाराज हैं तो....

इस घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य के गृह विभाग को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. वहीं, दूसरी ओर विपक्षी कांग्रेस ने मांग की कि इस घटना की जांच हाईकोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश के नेतृत्व वाली एसआईटी से कराई जाए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस घटना में सत्तारूढ़ पार्टी के लोग शामिल हैं. परीक्षा कराने वाली संस्था लोकरक्षक भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष विकास सहाय ने बताया कि पर्चा लीक होने की बात सामने आते ही कुछ घंटे पहले परीक्षा रद्द कर दी गई. Also Read - SSB Head Constable Recruitment 2021: 12वीं पास के लिए SSB में हेड कांस्टेबल के पदों पर निकली बंपर वैकेंसी, जल्द करें अप्लाई, 81000 होगी सैलरी

लोकरक्षक भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष सहाय ने कहा, “किसी ने मुझे जवाबों की एक सूची भेजी, जो परीक्षा के लिए तय किए गए सवालों के जबाव थे. यह स्पष्ट होने के बाद कि पर्चा लीक हो गया है, हमने परीक्षा रद्द कर दी.” उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए पुलिस टीम गठित की जाएगी. सहाय ने कहा कि, अभी हमें यह नहीं पता चला है कि पर्चा कहां से लीक हुआ. हमने हर जिले में पर्चा रखने की जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाये हुए थे और सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए थे. Also Read - Video: मुंबई में दौड़ती ट्रेन की चपेट में आया यात्री, मौत के मुंह से RPF कॉन्‍स्‍टेबल ने बचाया

परीक्षा रद्द होने पर विपक्षी कांग्रेस ने भाजपा सरकार की आलोचना की. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. गोहिल ने कहा, ”हमारी सूचना के अनुसार इसके पीछे सत्तारूढ़ पार्टी के लोग शामिल हैं.” उन्होंने कहा, ”इस मामले की जांच उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश के नेतृत्व वाली एसआईटी से कराए जाने पर ही हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि दोषियों को सजा मिलेगी. केवल तभी हम उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा नहीं होंगी.”