मुंबई/अहमदाबाद, 12 फरवरी | सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को गिरफ्तार करने के लिए गुजरात व मुंबई पुलिस का एक दल गुरुवार को उनके घर पहुंचा, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर एक दिन के लिए रोक लगा दी। कथित गबन के एक मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दी थी।

सामाजिक कार्यकर्ता 53 वर्षीय तीस्ता सीतलवाड़ व उनके पति जावेद आनंद दोनों ही पत्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता बने हैं और संभावित गिरफ्तारी झेल रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने हालांकि गुरुवार को दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीस्ता तथा उनके पति की गिरफ्तारी पर एक दिन की रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख मुकर्रर की।

न्यायालय ने यह आदेश वकील कपिल सिब्बल द्वारा मामले को उनके समक्ष पेश करने के बाद दिया। उल्लेखनीय है कि तीस्ता व उनके पति गुजरात के गोधरा सांप्रदायिक दंगा पीड़ितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। गोधरा में 27 फरवरी, 2002 में रेल की एक बोगी में लोगों को जिंदा जलाए जाने के बाद सांप्रदायिक दंगे की आग भड़की थी। सीतलवाड़ दंपति तथा कुछ अन्य लोगों को एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा जमा किए गए 1.5 करोड़ रुपये को कथित तौर पर हड़पने का आरोपी बनाया गया है।

यह रकम अहमदाबाद के गुलबर्गा सोसायटी में एक संग्रहालय बनाने के लिए इकट्ठा की गई थी, जहां सांप्रदायिक दंगे के दौरान 69 लोग मारे गए थे।  विभिन्न मुद्दों का हवाला देते हुए योजना को ठंडे बस्ते में डालने के बाद तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ यह शिकायत सोसायटी के 12 निवासियों द्वारा दाखिल की गई थी। वहीं, तीस्ता ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

इससे पहले, मंगलवार को गुजरात उच्च न्यायालय ने तीस्ता, आनंद, दंगे में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी के बेटे तनवीर जाफरी तथा सोसायटी के एक निवासी फिरोज गुलजार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।