अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी ने दलित राजनेता बीआर आंबेडकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ब्राह्मण’ बताया है और दावा किया है कि किसी भी ज्ञानी व्यक्ति को यह कहा जा सकता है. दलित नेता और गुजरात विधानसभा के सदस्य जिग्नेश मेवाणी तथा विपक्षी कांग्रेस ने त्रिवेदी की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की है. Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी ने Corona पर 46 जिलाधिकारियों से की बात, कोरोना के खिलाफ सुझाए 3 उपाय

गांधीनगर में ‘मेगा ब्राहमिन बिजनेस समिट’ को संबोधित करते हुए त्रिवेदी ने कहा, ‘‘मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि आंबेडकर भी एक ब्राह्मण थे, क्योंकि उनका उपनाम एक ब्राह्मण उपनाम था जो उन्हें उनके शिक्षक ने दिया था. वह खुद भी ब्राह्मण थे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसी ज्ञानी व्यक्ति को ब्राह्मण कहने में कुछ गलत नहीं है और इस संदर्भ में, मैं कहूंगा कि यहां तक कि (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदीजी (जो एक ओबीसी हैं) भी एक ब्राह्मण हैं. ’’ Also Read - PM Kisan Yojana: 14 मई को आएगी पीएम किसान की 8वीं किस्त, लिस्ट में ऐसे देखें अपना नाम

त्रिवेदी खुद भी ब्राह्मण हैं. वह पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में वड़ोदरा की रावपुरा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए हैं. Also Read - Coronavirus: PM मोदी ने कोविड-19 स्थिति पर इन 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से की बात

उनकी टिप्पणी ने विवाद पैदा कर दिया, जिसके बाद त्रिवेदी ने सोमवार को भगवत गीता का हवाला देकर कहा कि वह जातिवाद के खिलाफ हैं और उनके बयान को संदर्भ में नहीं देखा गया है. त्रिवेदी ने कहा, ‘‘भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि व्यक्ति के गुण के आधार पर जाति होनी चाहिए न कि उसके जन्म के आधार पर. इस प्रकार, किसी को भी उसके ज्ञान के गुण के आधार पर ब्राह्मण कहा जा सकता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे भाषण को संदर्भ से बाहर लिया गया है. मैं जातिवाद के पूरी तरह से खिलाफ हूं.’’

त्रिवेदी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए मेवाणी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को आंबेडकर को जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जातिवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी. कांग्रेस के समर्थन से निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए मेवाणी ने कहा, ‘‘त्रिवेदी का बयान उनकी उच्च जाति की मानसिकता दिखाता है. अपनी पूरी जिंदगी जातिवाद को खत्म करने के लिए संघर्ष करने वाले आंबेडकर को प्रमाण पत्र जारी करने का उन्हें क्या अधिकार है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘आंबेडकर कभी भी ब्राह्मण नहीं बनना चाहते थे. वह जाति रहित समाज देखना चाहते थे.’’ मेवाणी ने कहा, ‘‘आरएसएस के साथ जुड़े रहने की वजह से त्रिवेदी कभी भी आंबेडकर की शिक्षाओं को नहीं समझ सकते हैं. मैं उनकी टिप्पणी की निंदा करता हूं.’’

कांग्रेस ने ‘गैरजिम्मेदाराना’ बयान देने के लिए त्रिवेदी की आलोचना करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा और इसके नेताओं को आंबेडकर की याद सिर्फ दलित वोट हासिल करने के लिए आती है.