Gyanvapi के तहखाने में पूजा के मामले में मुस्लिम पक्ष को राहत नहीं, अगली सुनवाई 12 फरवरी को

ज्ञानवापी मामले में पूजा की इजाजत देने के विरोध में मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस बीच बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 12 फरवरी तय की है.

Published date india.com Published: February 7, 2024 4:36 PM IST
Gyanvapi के तहखाने में पूजा के मामले में मुस्लिम पक्ष को राहत नहीं, अगली सुनवाई 12 फरवरी को

Gyanvapi News Update: ज्ञानवापी में स्थित व्यास जी के तहखाने में पूजा पर रोक की मांग के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई की गई. जिला अदालत के व्यासजी के तलग्रह में पूजा करने के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. करीब ढ़ाई घंटे तक सभी पक्षों की तरफ से अदालत में रखी दलीलों के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की.

हाईकोर्ट में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति द्वारा अपील दायर की गई, जिसमें वाराणसी अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में पूजा करने की अनुमति को चुनौती दी गई थी. 12 फरवरी को फिर से मामले की सुनवाई शुरू होगी. इस दौरान ज्ञानवापी स्थित व्यास जी के तहखाने में पूजा जारी रहेगी.

मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

जिला जज द्वारा व्यासजी के तलग्रह में पूजा का अधिकार देने के फैसले से नाराज मुस्लिम पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मंगलवार यानी 6 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर अपील पर सुनवाई हुई. न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल के सामने मुस्लिम पक्ष ने अपनी बात रखी. उनका कहना था कि कोर्ट ने बिना अर्जी के मुस्लिम तहखाने में पूजा करने की अनुमति दी.

उधर मंदिर पक्ष का कहना है कि मुस्लिम पक्ष द्वारा दर्ज की गई अपील पर धारा 151 के तहत विवेकाधीकार से जज ने यह फैसला सुनाया था. इसके बाद कोर्ट ने 7 फरवरी यानी बुधवार को दोबारा सुनवाई का आदेश दिया और साथ ही सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को मीडिया ट्रायल से बचने की सलाह दी.

दोनों पक्षों के वकीलों की दलील

बुधवार को मंदिर पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और हरी शंकर जैन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सन् 1993 तक व्यास जी के तहखाने में रोज पूजा की जाती थी, उसके बाद सिर्फ साल में एक पूजा होने लगी. मस्जिद की कमेटी का तहखाने पर कोई कब्जा नहीं था और ना ही कभी पूजा पाठ को लेकर इन्होंने आपत्ति जताई है.

इसके साथ ही विष्णु शंकर जैन ने यह भी बताया कि साल 2016 में व्यास जी के तहखाने में अधिकारियों की मौजूदगी में रामचरित मानस का पाठ भी किया गया था. इस बात को साबित करने के लिए उनके पास जरूरी साक्ष्य भी थे. इसके अलावा एएसआई सर्वे के दौरान भी तहखाने में कलाकृतियां और मूर्तियां मिली थी.

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मस्जिद कमेटी के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिला जज वाराणसी का पूजा करने की अनुमति देने का आदेश अधिनियम 1991 का उलंघन है, जिला जज द्वारा पारीत आदेश के लिए कोई अर्जी नहीं दी गई थी. कोर्ट के मुताबिक रिसीवर नियुक्त करने वाली अर्जी पर सुनवाई के बाद 31 जनवरी को पूजा की अनुमति दी गई था. जिस पर मस्जिद कमेटी के वकील ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह बगैर अर्जी के स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे थे, तो यह बात विपक्षी को बताना चाहिए थी.

इसके साथ ही मस्जिद कमेटी के वकील ने 31 जनवरी के जिला जज के आदेश को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की. मंदिर पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन का कहना है कि जिला जज को 152 सीपीसी के तहत सुनवाई का विशेषाधिकार है.

आदेश के पालन पर भी सवाल

मस्जिद पक्ष का कहना है कि उन्हें जिला जज के 31 जनवरी के आदेश की प्रति एक दिन पहले मिली थी, ऐसे में डीएम को जिला जज का आदेश कैसे मिला, जिसकी सुनवाई 7 से 8 घंटे के बीच में हो गई. उधर मंदिर पक्ष ने कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद बैरिकेडिंग कर पूजा रोकी गई थी. उससे पहले यहां पूजा होती आ रही थी. जिला जज को अधिकार है कि वह बिना किसी अर्जी के विवेकाधिकार से आदेश दे सकते हैं.

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