नई दिल्ली: अमेरिका में ट्रंप सरकार के एच 1 बी वीजा नियमों को सख्त बनाने की खबरों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस कदम को भारत के लिए ‘बड़ा झटका’ करार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘कुछ ऐसी कुछ चीजे हैं जो गले लगाने से खरीदी जा सकती हैं’ लेकिन वीजा के लिए लोगों को अपने भरोसे रहना होगा. राहुल ने एक खबर को पोस्ट करते हुए ट्वीट किया, ‘‘नए अमेरिका वीजा नियम भारत के लिए बड़ा झटका हैं.’’

विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को गले लगाने के प्रधानमंत्री मोदी के चिरपरिचित अंदाज को लेकर उनपर कटाक्ष करते हुए राहुल ने कहा, ‘‘कुछ ऐसी चीजें हैं जो गले लगाने से खरीदी जा सकती हैं, वीजा के लिए आप अपने भरोसे रहिए. नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की प्रस्तावना डोनाल्ड ट्रंप ने लिखी है.’’ अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन एच-1 बी वीजाधारकों के पति या पत्नियों के कामकाजी वीजा समाप्त करने की योजना बना रहा है. इससे हजारों भारतीयों पर प्रभाव पड़ने का अंदेशा है.

क्या है मामला?
बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार एच -1 बी वीजाधारकों के जीवनसाथियों के लिए वर्क परमिट को समाप्त करने की योजना बना रही है. मतलब अगर पति के पास एच 1 बी वीजा है तो भी पत्नी को अमेरिका में रुककर कार्य करने की अनुमति नहीं होगी. इसी तरह पत्नी के पास वीजा होने पर पति को कार्य परमिट नहीं मिलेगा. माना जा रहा है कि इस कदम से हजारों भारतीयों पर असर पड़ेगा.

बराक ओबामा कार्यकाल के जीवनसाथी को कार्य परमिट देने के इस फैसले को खत्म करने से 70,000 से अधिक एच-4 वीजाधारक प्रभावित होंगे जिनके पास वर्क परमिट है. एच-4 वीजा एच-1 बी वीजाधारक के जीवनसाथी को जारी किया जाता है. इनमें से बड़ी संख्या में भारतीय कुशल पेशेवर हैं. उन्हें यह वर्क या कार्य परमिट ओबामा प्रशासन के कार्यकाल में जारी विशेष आदेश के जरिए मिला था. इस प्रावधान का सबसे अधिक फायदा भारतीय–अमेरिकियों को मिला था. एक लाख से अधिक एच -4 वीजा धारकों को इस नियम का लाभ मिल चुका है.

ट्रंप प्रशासन इस प्रावधान को समाप्त करने की योजना बना रहा है. इन गर्मियों में इस बारे में औपचारिक घोषणा हो सकती है. अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) के निदेशक फ्रांसिस सिसना ने सीनेटर चक ग्रासले को पत्र लिखकर यह जानकारी दी है. आव्रजन नीति संस्थान के हालिया अध्ययन के अनुसार अमेरिका ने एच -1 बी वीजा धारकों के 71,000 जीवनसाथियों को रोजगार की अनुमति दी है. इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं.