चुनाव के दौरान नौकरियों में अमेरिका के युवाओं को तरजीह देने का वादा करने वाले राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एच1बी वीजा के नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया है. अमेरिकी सरकार एच1बी वीजा ऐसे कर्मचारियों के लिए जारी करती है जो काफी कुशल होते हैं और ऐसे हुनरमंद लोगों की अमेरिका में कमी होती है. नए नियमों के तहत जॉब-वर्क करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों के लिए कम समय के लिए भारत से कुशल कर्मचारियों को बुलाने में भारी दिक्कतें हो सकती हैं. ट्रंप सरकार की नई नीति के तहत यह साबित करना होगा कि एक या एक से अधिक स्थानों पर जॉब-वर्क की तरह के काम करने के लिए इस वीजा पर बुलाए जा रहे कर्मचारी का काम खास तरह का है और उसे खास जरूरत के लिए बुलाया गया है.

हालांकि नए नियम जारी करने वाली अमेरिकी नागिरकता एवं इमिग्रेशन सेवा (यूएससीआईएस) का कहना है कि एच1बी के लिए जारी नए नियमों का उद्देश्य ट्रंप प्रशासन द्वारा अमेरिकी और गैर इमिग्रेंट कर्मचारियों के लिए वेतन और कार्य स्थितियों में सुधार करना है. नए नियमों के तहत अमेरिका के नागरिकता और इमिग्रेंट विभाग को अब एच1बी वीजा केवल तीसरे पक्ष के साइट कार्य (कार्यस्थल) की अवधि तक के लिए जारी करने की ही अनुमति होगी. इस तरह इसकी अवधि तीन साल से कम की हो सकती है, जबकि पहले यह एक बार में तीन साल के लिए दिया जाता था.

पहले कुछ इमिग्रेंट कर्मचारी 3 साल तक एच1बी वीजा लगातार दो बार लेकर छठे साल में ग्रीन कार्ड (अमेरिका की स्थाई नागरिकता) के लिए आवेदन कर देते थे. ऐसे में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक नौकरी नहीं होने पर भी उन्हें अमेरिका में रुकने की छूट मिलती थी. लेकिन नए नियम लागू होने के बाद एच1बी वीजा की अवधि तीन साल से कम की होगी और ऐसे में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना मुश्किल हो जाएगा. ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की स्थिति में भी प्रक्रिया के पूरी होने तक अब कर्मचारी को अमेरिका में रुकने की छूट नहीं मिलेगी और उसे अपने देश लौटना ही होगा.

भारत के 150 अरब डॉलर के सॉफ्टवेयर सर्विस मार्केट का बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है. इसके लिए हर साल H1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करती हैं इंफोसिस, टीसीएस जैसी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियां जो बड़े पैमाने पर हिंदुस्तानियों को अमेरिका भेजती हैं.

क्या हैं एच1बी वीजा

यह एक तरह की तत्काल सेवा है. 15 दिन के भीतर 1225 डॉलर की फीस देकर अमरीका के लिए वीज़ा मिल जाता है. एच1बी वीजा ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है जो किसी ‘खास’ कामों के लिए स्किल्ड होते हैं. इन ‘खास’ कामों में वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर शामिल हैं. इस वीज़ा के तहत हर साल 85,000 पेशेवर को वीजा दिया जाता है. एक अनुमान के अनुसार, तीन लाख भारतीय एच 1 बी वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं.