गांधीनगर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर के वैज्ञानिकों के मुताबिक देश का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अभी सूखे की चपेट में है और इनमें से कम से कम 16 प्रतिशत क्षेत्र असामान्य या चरम श्रेणी में पहुंच गया है. भारत की सूखा पूर्वानुमान प्रणाली का प्रबंधन करने वाले आईआईटी गांधीनगर ने यह शोध किया है. आईआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर, विमल मिश्रा ने बताया कि जारी सूखा इस साल गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर कई चुनौतियां पैदा करेगा. वैज्ञानिक ने कहा कि आने वाले वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से सूखे की आशंका बढ़ जाएगी. हम भूजल क्षमता को नहीं बढ़ा रहे हैं. दूसरी ओर, सूखे के कारण पानी खत्म हो रहा है. Also Read - IND vs AUS 4th Test Live Streaming: जानें कब और कहां देखें भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच चौथे टेस्ट का LIVE टेलीकास्ट और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग

इस सटीक निगरानी प्रणाली का संचालन करने वाली टीम ने भारतीय मौसम विभाग से मौसम और वर्षा संबंधी आंकड़ा एकत्र किया और फिर मिट्टी की नमी एवं सूखे के कारकों संबंधी आंकड़ों के साथ इसका अध्ययन किया. इस टीम में पीएचडी शोधार्थी अमरदीप तिवारी भी शामिल थे. Also Read - 83 तेजस बढ़ाएंगे भारत की ताकत, Indian Air Force के इस फाइटर जेट की 12 व‍िशेषताएं जानें यहां

आईआईटी गांधीनगर स्थित जल एवं जलवायु प्रयोगशाला द्वारा तैयार किए गए आंकड़े भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. Also Read - DNA होगा, आत्मनिर्भर भी बनेगी: अब ऐसे बदलेगी पाकिस्तान से आई गीता की जिंदगी, कभी सुषमा स्वराज ने...

प्रयोगशाला के प्रमुख मिश्रा ने कहा, देश का लगभग 47 प्रतिशत भाग सूखे का सामना कर रहा है, जिनमें 16 प्रतिशत क्षेत्र सूखे की चरम या असाधारण श्रेणी में पहुंच गया है. इस शोध को हमने अपनी सटीक निगरानी प्रणाली से किया है, जिसे हमने देश के लिए विकसित किया है.’’

मिश्रा ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में इस साल अच्छी बारिश नहीं हुई और झारखंड, दक्षिणी आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु के उत्तरी हिस्से सूखे की चपेट में हैं. उन्होंने कहा कि हम भूजल क्षमता को नहीं बढ़ा रहे हैं. दूसरी ओर, सूखे के कारण पानी खत्म हो रहा है.

वैज्ञानिक ने कहा कि आने वाले वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से सूखे की आशंका बढ़ जाएगी.मिश्रा ने कहा कि सरकार को भूजल और जल संरक्षण के संबंध में कुछ कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है.