नई दिल्ली: वायुसेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना को एक बड़ी ताकत मिलने जा रही है. जी हां, दरअसल फ्रांस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पहला राफेल विमान RB 001 सौंप दिया है. वायुसेना के बेड़े में राफेल को शामिल कराने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मेरीनेक स्थित दसॉ एविएशन प्लांट में मौजूद थे. राफेल विमान सौंपे जाने के बाद राजनाथ सिंह ने राफेल विमान पर कुमकुम से ओम लिखा और टीका लगाया. उन्होंने पूजा अर्चना भी की. साथ ही उन्होंने विमान पर नारियल और फूल भी चढ़ाए. शस्त्र पूजा के दौरान भारतीय वायुसेना सेना और थल सेना के वाइस चीफ भी मौजूद रहे. इसी के साथ राफेल विमान आधिकारिक रूप से भारत का हो गया है. हालांकि राफेल को फ्रांस से हिंदुस्तान आने में अभी अगले साल मई तक का इंतजार करना पड़ेगा. उसके लिए भारतीय वायुसेना जरूरी बुनियादी ढांचा तैयारी करने और पायलटों को प्रशिक्षण देने समेत जरूरी तैयारियां कथित रूप से कर रही है. सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल लड़ाकू विमान में दसां एविएशन के हेड टेस्ट पायलट फिलिप ड्यूचेटो के साथ उड़ान भरी. राजनाथ सिंह लगभग 30 मिनट तक राफेल विमान में आसमान में रहे.

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इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विश्व के दो सबसे मजबूत लोकतंत्र के बीच रिश्ता गहरा होता रहेगा. उन्होंने आगे कहा, “मुझे खुशी है कि राफेल विमान की डिलीवरी तय समय पर हो रही है, मुझे विश्वास है कि इससे हमारी वायु सेना में और मजबूती आएगी. मैं चाहता हूं कि हमारे दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़े.” मेरिनैक (फ्रांस) में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ये भी कहा कि आज का दिन भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी में एक नया मील का पत्थर साबित हुआ. रक्षा मंत्री ने कहा, “भारत में, आज दशहरा का त्योहार है जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है जहां हम बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न के रूप में मनाते हैं. आज 87वां वायु सेना दिवस भी है, इसलिए यह दिन कई मायनों में प्रतीकात्मक बन जाता है.”

रक्षा मंत्री ने आगे कहा, “मुझे बताया गया है कि राफेल एक फ्रांसीसी शब्द है जिसका अर्थ आंधी होता है. मुझे यकीन है कि विमान अपने नाम पर खरा उतरेगा. मेरा मानना है कि राफेल क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत के हवाई प्रभुत्व को तेजी से बढ़ाएगा.”

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यहां फ्रांस के राष्ट्रपति एमेनुअल मैक्रों से मुलाकात की तथा दोनों देशों के रक्षा एवं रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने के बारे में चर्चा की. भारतीय वायुसेना ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू जेट की खरीद की है. फ्रांस द्वारा पहले राफेल को आधिकारिक रूप से सौंपे जाने के कार्यक्रम के तहत सिंह सोमवार को फ्रांस आए. फ्रांस के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस में उनसे मुलाकात के दौरान सिंह ने फ्रांस को भारत का ‘‘ महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार’’ बताया. रक्षा मंत्रालय ने इस मुलाकात को ‘‘बहुत गर्मजोशी से भरी और फलदायी’’ बताया.

बैठक करीब 35 मिनट चली. इसके बाद मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया. इसमें कहा गया, ‘‘यह बैठक दर्शाती है कि भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय साझेदारी कितनी गहरी है, खासकर रक्षा क्षेत्र में और हाल के वर्षों में यह उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ हुई है. दोनों नेताओं ने इन संबंधों को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प लिया.’’ इसमें कहा गया, ‘‘दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने और मेक इन इंडिया पहल को समर्थन देने के लिए सिंह ने राष्ट्रपति मैक्रों का आभार व्यक्त किया.’’

गौरतलब है कि भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस से 59,000 करोड़ रुपए में 36 राफेल लड़ाकू जेट का सौदा किया था. हालांकि राफेल सौंपने का आधिकारिक समारोह इस हफ्ते हो रहा है लेकिन राफेल विमानों की पहली खेप मई 2020 में ही मिल पाएगी. सभी 36 विमान सितंबर 2022 तक भारत को मिल जाएंगे. दसॉल्ट एविएशन ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘रक्षा क्षेत्र में, भारतीय वायु सेना हमारी पुरानी ग्राहक है और वर्ष 1953 से दसॉल्ट के विमान उड़ा रही है. वर्ष 2016 में हुआ 36 राफेल का सौदा और मिराज 2000 आई/टीआई का आधुनिकीकरण इसी ऐतिहासिक साझेदारी का हिस्सा है.’’ राफेल सौंपे जाने के समारोह के बाद सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री के बीच मंगलवार शाम को पेरिस में सालाना भारत-फ्रांस रक्षा चर्चा होगी. बुधवार को सिंह फ्रांस के अग्रणी रक्षा उद्यमों के सीईओ को संबोधित करेंगे.

बता दें कि राफेल 4.5वीं पीढ़ी का विमान है जिसमें राडार से बच निकलने की युक्ति है. इससे भारतीय वायुसेना (आईएएफ) में आमूलचूल बदलाव होगा क्योंकि वायुसेना के पास अब तक के विमान मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई या तो तीसरी पीढ़ी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं.