Independence day 2018: भारत में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर भारत का राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं. वहीं 26 जनवरी के दिन देश के राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं. इस बार भारत अपना 72वां आजादी दिवस मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के लिए 15 अगस्त के दिन को ही क्यों चुना गया. यह कोई भी दूसरा दिन हो सकता था. लेकिन इसी दिन क्यों… क्या आपने कभी सोचा है इस बारे में? इस बारे में हालांकि अलग-अलग इतिहासकारों की मान्यताएं भिन्न हैं. Also Read - देश की आजादी के 75वें वर्ष को मनाने के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में समिति गठित, सोनिया, ममता और मुलायम सिंह भी शामिल

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कुछ इतिहासकारों के ब्रिटिश 30 जून 1948 तक भारत की सत्ता ट्रांसफर करने वाला था, लेकिन सी राजगोपालाचारी ने भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को यह सुझाव दिया कि आजादी की तारीख 30 जून 1948 नहीं बल्कि 15 अगस्त 1947 होनी चाहिए. दरअसल, राजगोपालाचारी ने लॉर्ड माउंटबेटन से कहा था के 30 जून 1948 तक अगर इंतजार किया गया तो हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता ही नहीं बचेगी. इसके बाद ही माउंटबेटन ने 15 अगस्त का दिन चुना था. Also Read - इस बार स्वतंत्रता दिवस पर नदारद रहीं चाइनीज पतंगें, हिंदुस्तानी पतंगों ने बिखेरा अपना रंग

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इसके उपरांत ही ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में Indian Independence Bill को पेश किया गया. वह 4 जुलाई 1947 का दिन था. इस बिल में भारत के बंटवारे और पाकिस्तान के बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया था. यह बिल 18 जुलाई 1947 को स्वीकारा गया और 14 अगस्त को बंटवारे के बाद 15 अगस्त 1947 को मध्यरात्रि 12 बजे भारत की आजादी की घोषणा की गई.

लेकिन कुछ इतिहासकार ऐसा नहीं मानते. उनके अनुसार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का फैसला माउंटबेटन का अपना निजी फैसला था. इतिहासकारों के अनुसार माउंटबेटन यह दिखाना चाहते थे कि उनके हाथ में नियंत्रण है.

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जबकि कुछ इतिहासकार मानते हैं कि माउंटबेटन 15 अगस्त को शुभ तारीख मानता था और इसीलिए उसने स्वतंत्रता दिवस के रूप में 15 अगस्त को फाइनल कर दिया. दरअसल, 15 अगस्त के दिन ही साल 1945 में जापानी सेना ने उनके सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. तब माउंटबेटन अलाइड फोर्सेज के कमांडर थे और इसके बाद से ही वह 15 अगस्त को शुभ तारीख के रूप में देखने लगे.

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